रिपोर्ट ; वारिस अली /गौतम शर्मा ,मो ० तस्लीम
डेहरी /रोहतास
डिहरी निकाय चुनाव के समय अपने को सुयोग्य,कर्मठ ,संघर्षशील कहने वाले प्रत्याशी
गायब हो चुके है। ठीक उसी तरह जिस तरह बरसात में मेढ़क जमीन पर जगह -जगह दिखाई पड़ते है।
अपने को सुयोग्य कहने वाले सभी उम्मीदवार ग़ुम हो चुके है। उन्हें अब जनता की समस्या सुनने की फुर्सत नहीं है और चिंता भी नहीं
जनता अब कहने लगी है कि मान गए, इन नेताओ की चिकनी चुपड़ी बात। चुनाव में तो लगता है कि
वो सच्चे और बहुत ही बड़े समाजसेवी है। हैण्डबिल देखे तो लगेगा कि उनसे बड़ा कोई है ही नहीं जो नगर
के लोगो का भला कर सके। चुनाव रद्द होते ही नगर चुनाव में उतरे सभी उम्मीदवार लापता हो गए है।
ना नगर की समस्याओ को बेहतर बनाने की फ़िक्र है और ना ही कोई योजना बनाने की चिंता !
अक्सर देखने में आया है कि सभी प्रत्याशी अपने आप को लिखते है -सुयोग्य ,कर्मठ ,संघर्षशील और
शिक्षित ,यह केवल ठगने वाला भाषा है। लोगो को छलने का लुभावाना शब्द।
नगर की जनता उन सभी प्रत्याशिओं को ढूंढ रही है,जो मैदान में थे। कहीं तो नज़र आ जाये,राशन कार्ड और वोटर लिस्ट से बाहर हुए लोग परेशान है। इनकी खोज खबर करने वाला कहीं नज़र नहीं आ रहा है। लोगो में यह भी चर्चा आम होने लगी है
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