महालोक आस्था का पर्व विदेशो मे भी होता है


रिपोर्ट :-गौतम शर्मा ,मो0 तस्लीम

डेहरी/रोहतास 
 लोक आस्था का महान पर्व छठ में कार्तिक माह के षष्ठि तिथी पर सूर्य का विशेष महत्व माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य सौरमंडल का केन्द्र बिंदू तो है ही यह हिंदुओं के आरध्यदेव भी है। भारत ही नहीं अपितु अन्य देशों के लोग भी सूर्य की पूजा करते है।

ज्योतिषाचार्य पंडित दिलीप मिश्र की माने तो पौराणिक मान्यताओं के साथ विश्व के इतिहास के पन्नों पर भी सूर्य उपासना का उल्लेख है। मिश्र की पौराणिक मान्यता के अनुसार हिलिया, पोलियों को सूर्य की राजधानी कहा गया है। अपोलो यूनानी व रोम के निवासियों के आराध्य एवं इष्ट देव सूर्य ही है। कहा जाता है कि सूर्य पुत्र फोथन ने जब आग्नेय रथ को आकाश मार्ग से हांकने का प्रयास किया तब वह पृथ्वी की कक्षा के सन्निकट आ पहुंचा। उन्होने बताया कि ईसाइयों केधर्मग्रन्थ ओल्ड टेस्टामेंट में जोशआ को सूर्य प्रसाद में ही दफनाया गया। पादरी जॉब ने भी प्रभातकालीन सूर्य की सुनहरी किरणों की मौजूदगी में सत्संग का लाभ उठाने की बात कही थी। उन्होने अपने घर का नाम वेथ रोमेश रखा जिसका अर्थ सूर्य भवन होता है। चिर पुरातन की संस्कृति में उल्लेख है कि राजधानी कुनको में विशाल सूर्य मंदिर बना हुआ था। वहीं मैक्सिको के देवालयों में भी आज भी विशाल सुनहरे रंग की स्वर्ण चकतियां है जो सूर्य उपासना का प्रमाण देती है। ब्राजिल व न्यूजी लैन्ड के आदिवासी सूर्य को एक विराट आत्मा के रूप में मानते है। उत्तरी अमेरिका में अनेक समुदाय सूर्य. को देवता मानते और उनकी पूजा करते है। क्रो, प्यूबलो, नैचेज, ब्लैक फूट, इरोकोइस, व सिओव नाम भी सूर्य के ही है। ध्रुव प्रदेश इस्कीमो जाति के लोग सूर्य नृत्य करते है। यहूदी व ईसाई धर्म के अनुयायी अपना धार्मिक दिन रविवार यानि सण्डे को मनाते है।

प्रसिद्ध वैज्ञानिक आर्कमडिज ने सौर उर्जा के प्रयोग के लिए एक दशक सीसे का इस्तेमाल किया था जिसका बाद में युद्ध के दौरान आयुध के रूप में प्रयोग हुआ। युनानी लोग सूर्य को अपोलो के नाम से पुकारते है । अंग्रेजी का हिलियम शब्द की उत्पति सूर्य से ही हुई है। वहीं भारतीय धर्म ग्रन्थों में संपूर्ण विश्व के चार अंचल सबको उर्जा व जीवन देने वाला सूर्य ही है। ज्योतिषी व जन्मकुंडली के जानकार विद्धान पंडित चंद्रगुप्त ने बताया कि कार्तिक मास की षष्ठि तिथी को सूर्य का खगोलिय महत्व माना गया है। इस समय सूर्य धरती के दक्षिणी गोलार्ध में रहता है। सूर्य के दक्षिनायण में रहने पर उसकी अल्ट्रावायलेट किरणे धरती पर सामन्य से अधिक मात्रा में आती है।.