रिपोर्ट ;-मयंक शास्त्री
बारुण(औरंगाबाद):- रूस व यूक्रेन के बीच छिड़े युद्ध के दौरान बारुण प्रखंड के पंडित बिगहा के निवासी अरविंद सिंह के पुत्र संदीप कुमार अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई को लेकर गए यूक्रेन में ही फंस गया था। जो सकुशल अपने घर शनिवार को लौट आया है। उसके आने के बाद घर के स्वजनों में काफी खुशी का माहौल देखने को मिला, वही संदीप को मिठाई खिला कर अपनी खुसी जाहिर की। संदीप कुमार ने यूक्रेन में बीते सारी घटनाओं को जानकारी देते हुए बताया कि 21 फरवरी को यूक्रेन सरकार ने एडवाजरी जारी कर दी। जिसके बाद जैसे ही 24 फरवरी को अपनी फ्लाइट पकड़ने के लिए बोरिस्फिल एयरपोर्ट बस से पहुंचे वैसे ही एयरपोर्ट पर बमबारी शुरू हो गयी। जैसे ही यह घटना घटी संदीप सहित साथ मे रहे अन्य 21 छात्र भी अपना सारा सामान छोड़ कर भागने लगे। साथ में केवल जरूरी कागजात लिए।जिसके बाद टैक्सी से भारतीय दूतावास पहुंचे।जहां उन्हें दूतावास के तरफ से तीन दिनों तक एक विद्यालय में ठहराया गया। संदीप ने बताया कि भारतीय दूतावास के तरफ से कोई भी इस दौरान सुविधा नही दी गयी थी। तीन दिनों में मात्र एक रात खाने को दिया गया था।वो भी काफी कम मात्रा में।जिसके बाद 26 फरवरी को भारतीय दूतावास के तरफ से बताया गया कि सभी कीव रेलवे स्टेशन जाए और वहां से चंविश्कि के लिए ट्रेन खड़ी है जो भारतीय दूतावास के तरफ व्यवस्था की गयी है। लेकिन स्टेशन पहुंचने पर ठीक इसके विपरीत हुआ वहां खड़ी ट्रेनों में हमे बैठने ही नही दिया। जब इस मामले में भारतीय दूतावास से सम्पर्क करने लगा तो उहोने सम्पर्क नंबर बन्द कर दिया। हम सभी स्टेशन पर रुके व दो लड़के जब वापस दूतावास गए तो उन्हें अंदर नही जाने दिया गया। हम सभी पूरी तरीके से फंस चुके थे। स्टेशन के चारो तरफ से हवाई बमबारी हो रही थी। उस समय सबसे अधिक डर लगा।क्योंकि दूतावास से कोई जवाब नही आ रहा था और न सम्पर्क हो रहा था। वह पल हम सभी छात्रों को लगा कि अब हम सब नही बचेंगे। उस समय अपने परिवार को याद करते हुए दो घण्टे तक स्टेशन पर ही रुके। वो जीवन का सबसे भावुक व कठिन पल था।जो मैं कभी नही भूलूंगा। कुछ समय के बाद एक ट्रेन आयी जिसमें किसी तरह आग्रह करके बैठे । जहाँ से लवयुब पहुंचे और वहां से चेन्विस्की फिर लगभग 35 किलोमीटर पैदल चल कर रोमानिया यूक्रेन के बॉर्डर पर पहुंचे। जिसके उपरांत रोमानिया में पहुंचे जहां से रोमानिया सरकार ने सारी सुविधाओ के साथ तीन मार्च बुचारेस्ट एअरपोर्ट से भारत सरकार द्वारा भेजी गई फ्लाइट से दिल्ली के लिए रवाना हुए। दिल्ली के बाद बिहार सरकार के द्वारा फ्लाइट से पटना पहुंचे। वही संदीप बताते है कि 24 फरवरी से तीन मार्च तक लगभग एक लाख तीस हजार रुपये खर्च हों गये,क्योंकि टैक्सी से सारे सामान काफी महंगे हो गए थे। साथ ही बताया कि उनके कॉलेज के द्वारा ऑनलाइन क्लास चलाया जा रहा है। जैसे ही यूक्रेन में सही हालात होंगे वे वहां अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए जाएंगे।