रिपोर्ट:-गौतम कुमार
डेहरी/रोहतास
डेहरी अनुमंडल क्षेत्र के वार्ड नंबर 35 में सरकारी भूमि(खास महल) का कब्जा व अतिक्रमण कर मदरसा चलाने वाले एक मौलाना द्वारा वरिष्ठ पत्रकार के खिलाफ दूसरे के नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर ए दारा सरिया पटना से मंगाया गया है फतवा जिसके नाम से आया है उसने अनुमंडल न्यायालय में शपथ पत्र के द्वारा उसका खंडन करते हुए कहा है कि मेरा हस्ताक्षर फर्जी है और मैंने ऐसा कोई फतवा नहीं मंगाया यह कार्य मौलाना एहसान उल हक कासमी जो मदरसा चलाते हैं उनके द्वारा ऐसा फर्जी काम किया गया है उल्लेखनीय है कि उक्त मौलाना एहसान उल हक कासमी जो अपने को काजी शरीयत बताते हैं इमारत सरिया पटना से फतवा मंगाते हैं इनके फतवे पर अब किसी को भरोसा भी नहीं रहा दर्जनों ऐसा मामला सुनने को मिला है और इन पर मामले भी न्यायालय में चल रहे हैं जो जांच का विषय है डेहरी शहर के विवादित इस मौलाना से कई लोग आक्रोश में है प्राप्त खबर के अनुसार वरिष्ठ पत्रकार समाजसेवी और कौमी एकता की मिसाल रहे पत्रकार वारिस अली जो कि पिछले 25 30 वर्षों से राष्ट्रीय एकता और सद्भावना के लिए कौमी एकता की मिसाल के रूप में स्थापित है जिन्होंने होली मिलन ईद मिलन कवि सम्मेलन नातिया मुशायरा के साथ-साथ सभी तरह के पूजा समारोह में हिस्सा लेकर आपसी सौहार्द का काम करते रहे वर्तमान में प्रशासन द्वारा बनाए गए नगर मोहर्रम कमेटी के सचिव भी हैं जो होली और ईद सभी तरह के त्योहारों पर प्रशासन के सहयोग में एकता भाईचारे के लिए लगे रहने का काम करते रहे उल्लेखनीय है कि गत दिनों डेहरी नगर थाने में दर्ज छेड़खानी के एक मामले खबर अपने दैनिक अखबार में प्रकाशित किया था जोकि मौलाना एहसान उल हक कासमी से जुड़ा हुआ है इस बात से नाराज होकर मौलाना ने वरिष्ठ पत्रकार पर फर्जी हस्ताक्षर करा कर एक एक फतवा हिंदुओं के दुर्गा पूजा में सहयोग करने के मामले में उन पर मंगवाया है और उसका वितरण भी सामूहिक रूप से किए हैं फतवा पर जिसका हस्ताक्षर बनाया गया है कुछ व्यक्ति नसरुल्लाह खान ने अनुमंडल न्यायालय में शपथ पत्र देते हुए फतवा का खंडन किया है और कहा है कि मेरा हस्ताक्षर फर्जी बनाकर एमारत सरिया के तथाकथित काजी एहसान उल हक कासमी द्वारा यह मंगाया गया है पत्रकार समाज का आईना होता है और समाज को जोड़ने का काम करता है लेकिन इस तरह के मौलाना के फतवे से पत्रकार को मानसिक आर्थिक सामाजिक और शारीरिक परेशानी बढ़ गई है जिसके खिलाफ न्यायालय के शरण में जाने को मजबूर हो गए हैं सूत्र बताते हैं कि मौलाना द्वारा इस तरह का पूर्व में भी डराने धमकाने के लिए अन्य लोगों के खिलाफ फतवा मंगाया जा चुका है यह जांच का विषय है वैसे इस बात को लेकर पत्रकारों और सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ता प्रबुद्ध जनों में काफी आक्रोश है प्रशासन को शीघ्र फर्जी फतवे की जांच पड़ताल कर मौलाना पर कार्रवाई करनी चाहिए