गौतम कुमार ,कमलेश मिश्रा की रिपोर्ट ;-
डेहरी /डालमियानगर
डालमियानगर आज बिहार को लेकर बिहार की संस्कृति ,सभ्यता को लेकर कार्यरत एक आईपीएस अधिकारी आज युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए है । जी हां हम बात कर रहे है 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी रोहतास के पूर्व पुलिस अधिक्षक वर्तमान में पटना आईजी सह बिहार सरकार में गृह विभाग के विशेष सचिव आईपीएस विकास वैभव की,यह वही विकास वैभव है जिन्होंने रोहतास जिले को नक्सलियों से मुक्त ही नही कराया बल्कि रोहतास के धरोहर रोहतास किले पर पहली बार तिरंगा फहराया था , विकास वैभव अर्थात आओ बिहार को प्रेरित करे नाम से एक मुहिम चला रहे है , इस मुहिम के माध्यम से युवा पीढ़ी को बताना चाहते है की हमारी भूमि बिहार आदिकाल से ही ज्ञान की भूमि रही है , हमारा इतिहास ,हमारी संस्कृति, हमारी सभ्यता सभी प्रेरणा का स्रोत है , इतिहास की प्रेरणा में ऐसी अद्भुत शक्ति समाहित है जो बिहार समेत संपूर्ण भारतवर्ष के भविष्य को परिवर्तित करने की क्षमता रखती हैं , विकास वैभव कहते है की भविष्य परिवर्तन के निमित युवाओं द्वारा संकल्पित सकारात्मक चिंतन एवं योगदान ही बिहार के उज्ज्वलतम भविष्य की दिशा स्थापित करने का एकमात्र विकल्प है ,
विकास वैभव के इस अभियान से प्रेरित होकर छात्र नेता यश उपाध्याय ने उनके कार्यशैली पर कविता लिखकर कल उन्हे सरदार पटेल भवन में उनके कार्यालय पर कविता समर्पित की ,अपनी के एक पंक्ति में यश उपाध्याय लिखते है ,
पुरुषोत्तम तहरा ला ई बिहार
तू ऐकर गदाधारी हो..
अर्थात इस पंक्ति के माध्यम से यश बिहार की तुलना राम से करते है और विकास वैभव को गदाधारी हनुमान बताते है । वो कहते है की विकास वैभव ठीक उसी तरह बिहार की सेवा में लगे रहते है जिस तरह गदाधारी हनुमान श्री राम की सेवा में। यश उपाध्याय का कहना है की आईपीएस तो बहुत देखे पर पहली बार एक ऐसे आईपीएस को देखा जो बिहार को सिर्फ कर्मभूमि मान कर सिर्फ कर्म नही कर रहे हैं बल्कि साथ ही साथ बिहार को मातृभूमि मान कर अपना तन मन धन सर्वस्व निछावर करने हेतु तैयार है,आज जिस तरह विकास वैभव ने बिहार के युवाओं को प्रेरित करने हेतु "आओ बिहार को प्रेरित करे" जो मुहिम चलाया है उससे अनेकों युवा प्रेरित होकर इस मुहिम से जुड़ रहे है,आज समाज को जरूरत है प्रेरणा के एक सूत्र में बंध युवा पूरे बिहार को प्रेरित करे ताकि बिहार अपनी पूर्व प्रतिष्ठा को प्राप्त कर गौरवशाली इतिहास की पुनः रचना करे सके,
