गौतम कुमार ,कमलेश मिश्रा की रिपोर्ट ;-
डेहरी /डालमियानगर
अगर उधोग परिसर में धरना प्रदर्शन होगा तो होगीं कारवाई, एआर वर्मा
समापन में चले गए रोहतास उधोग समूह के पूर्व कर्मचारियों का दोहन करने वाले नेताओं का धरना प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है बताते चलें कि स्थानीय नेताओं के द्वारा बेवजह धरना प्रदर्शन करते हुए इन कर्मचारियों से मोटी रकम वसूल की जाती है. स्थानीय प्रशासक ए आर वर्मा ने कहा है कि कंपनी न्यायालय के आदेश पर उधोग समूह के मान्य कर्मियों और मजदूरों को न्यायालय के आदेश दिनांक 22 नवंबर 2013 के तहत सेटलमेंट बकाए की राशि का फूल एण्ड फाइनल पेमेंट कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इससे असहमति रखने वालों के लिए न्यायालय का दरवाजा खुला हुआ है। कहा कि डालमियानगर कंपनी कार्यालय परिसर के बाहर धरना प्रदर्शन करने वालों के विरुद्ध ठोस कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मजदूरों कर्मचारियों को अधिक लाभ दिलाने के नाम पर अवैध तरीके से चंदा उगाही कर अपनी दुकान चला रहे हैं उनसे मजदूरों को सजग रहने की जरूरत है। श्री वर्मा यहां प्रेस प्रतिनिधियों से बात कर रहे थे जिसमें उन्होंने उक्त बातें कहीं।
अधिकारी ने बताया कि मजदूरों के बकाए राशि का भुगतान उनकी सहमति उपरांत किया जा चुका है जिसमें वेतन, ग्रेच्युटी बोनस, छुट्टी और पीएफ की राशि शामिल हैं। बताया कि असहमति रखने वालों ने न्यायालय का रुख किया था और बाद में उन्होंने भी अपनी राशि प्राप्त कर ली है। हालांकि उन्होंनेे कहा कि कुछ कैजूअल और ठेका मजदूर लाभ देने के दायरे में नहीं आ रहे थे उन्हें बेनिफिट नहीं मिला है और उनकी संख्या करीब पंद्रह सौ के आसपास है।
रोहतास उधोग समूह के समापन में चले जाने के बाद सूत्र बताते हैं कि मजदूरों के पक्ष में आए आदेश के बाद सेटलमेंट के आधार पर करीब 100 करोड़ रुपए का भुगतान हो चुका है। इस भुगतान में स्थानीय कर्मचारी सिया राम सिंह यादव को भी लगभग ₹75000 से ज्यादा का भुगतान हो चुका है. वहीं बैंक,वन विभाग, रेलवे आदि को भी करीब 200 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ है। बिजली विभाग का करीब 60 करोड़ रुपए अभी बकाया है जो प्रक्रिया के अंतर्गत है। अधिकारी ने बताया कि मजदूरों को गुमराह कर धरना प्रदर्शन करने वाले सियाराम सिंह ने भी नियम के अंतर्गत 75 हजार 590 रुपए का क्लेम भुगतान प्राप्त किया है और अब अधिक लाभ दिलाने के नाम पर मजदूरों को भड़का रहे हैं। कंपनी परिसर में कोर्ट के आदेश के बिना अनुमति के धरना प्रदर्शन करना गैर कानूनी है। बताया कि इस संबंध में रोक लगाने और कार्रवाई के लिए उद्योग समूह के प्रशासक के द्वारा पत्रांक RI/IC/419/21 के द्वारा थानाध्यक्ष, अनुमंडल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के भी संज्ञान में जानकारी दी गई है। तथा कहा गया है कि पूर्व कर्मचारियों से चंदा के नाम पर मोटी राशि की उगाही की जा रही है यह कर्मचारियों शोषण है। कहते हैं पदाधिकारी: उद्योग समूह के प्रभारी ए आर बर्मा का कहना है कि जुलाई 1984 से दिसंबर 1995 तक 11 साल 6 महीने का वेतन का भुगतान माननीय न्यायालय के आदेशानुसार सभी कर्मचारियों को कर दिया गया है जो अपने आप में समापन में चले गए कंपनियों के लिए एक इतिहास है।
