नगर निकायों के कर्मियों की मांगों को सरकार अविलम्ब पूरी करे,


 गौतम कुमार ,कमलेश मिश्रा की रिपोर्ट ;-

डेहरी/डालमियानगर

बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (सम्बद्ध ऐक्टू द्वारा नगर निकायों में वर्षो से कार्यरत सफाई कर्मी सहित अन्य दैनिक कामगारों की सेवा का नियमितीकरण सहित 12 सूत्री मांगों की पूर्ति हेतु डेहरी नगर परिषद् सहित पुरे बिहार के नगर निकाय कर्मी  बिहार लोकल बॉडीज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के साथ मोर्चा का गठन कर 7 सितंबर 2021 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। नगर कर्मियों का समर्थन करते हुए डेहरी विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी सह जन अधिकार पार्टी के प्रदेश महासचिव समीर कुमार ने कहा कि सरकार मजदूरों के जायज मांगों को मानने के बजाय उल-जलुज बहाना बनाकर पल्ला झड़ना चाहती है, हम और हमारी पार्टी जाप(लो०) मजदूरों के आंदोलन में उनके साथ हैं,
समीर ने कहा कि प्रयागराज कुंभ 2019 में देश के सामने एक तस्वीर आई थी जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सफाई कर्मियों के पैर धो रहे थे और उन्हें स्वच्छता के सिपाही बता कर उनकी तारीफों के क़सीदे भी पढ़ रहे थे। वहीं वर्ष 2020 और 2021 में कोरोना महामारी के दौरान इन्हीं सफाईकर्मियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए अपना काम बख़ूबी चालू रखा और सफ़ाई व्यवस्था के कार्य में लगे रहे। तब इन्हीं सफ़ाई कर्मचारियों को कोरोना वारियर्स, कोरोना सिपाही और न जाने किन किन नामों से नवाजा गया। यह सब भी देश ने देखा, लेकिन डबल इंजिन की बिहार सरकार को शायद प्रधानमंत्री मोदी की बातों और उनकी संवेदनाओं से कुछ भी लेना देना नही लगता। बिहार के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में स्वच्छता और सफ़ाई व्यवस्था में लगे हजारों की तादाद में सफ़ाई कर्मी अपना काम छोड़, कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर हैं। वहीं बिहार की भाजपा-जदयू सरकार उनकी इन मानवीय और तर्क पूर्ण मांगों से पल्ला झाड़ रही है, सरकार कह रही है कि उनकी मांगे सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं और उनकी जिम्मेदारी नगर निगमों और नगर निकायों की है। वही उनकी मांगों पर विचार करे,
बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के सफाईकर्मचारी अपनी वाज़िब मांगों को लेकर सड़कों पर आन्दोलनरत हैं। उनकी मांग है कि पुरे बिहार से स्थानीय निकाय, नगर निगम और नगर पंचायतों सहित अन्य विभागों चिकित्सालय, शैक्षणिक संस्थानों आदि) में सफ़ाई कार्य से ठेका प्रथा को पूर्ण रूप से समाप्त किया जाये, सफाईकर्मियों के स्थायी पदों पर भर्ती शुरू करते हुए स्वच्छता समिति, संविदा और आउट सोर्सिंग सफ़ाई कर्मचारियों को नियमित किया जाए ,
सरकार सफाईकर्मियों की लगातार उपेक्षा कर रही है जिससे उनका उत्पीड़न हो रहा है, उन्हें मात्र 250 रूपये प्रतिदिन मानदेय मिलता है और वो भी अनियमित है इतना आसमान छूती मंहगाई और इतने कम पैसों में वो अपने कर्तव्यों का निर्वाह तो क्या वो अपने परिवार का पेट भी नही भर सकते हैं। सरकार कहती है कि बच्चों को पढ़ाओ लिखाओ, पर क्या कोई इतने पैसों में अपने बच्चों को पढ़ा लिखा सकता है और क्या अपने परिवार का लालन पालन भी कर सकता है।सरकार को उनकी मांगों को तुरंत मानना चाहिए और अपना उपेक्षा भरा रवैया छोड़ कर उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान करना चाहिए,