गौतम कुमार ,के वीरेंद्र की रिपोर्ट ;-
डेहरी /रोहतास
बिहार विधान सभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी के अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति एव॔ उसके बिहार सरकार के खिलाफ आक्रामक रूप के कारण जनता दल यूनाइटेड को काफी नुकसान हुआ था और उसे भारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी।सत्तारुढ़ दल होने के बावजूद जदयू को विधायकों की संख्या बल में तीसरे नंबर की पार्टी बन संतोष करना पड़ा था।जदयू सुप्रीमों व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को यह बात काफी नागवार गुजरी थी।वह लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान से खासे नाराज दिख रहे थे।तब सुशासन की दंभ भरने वाले नीतीश कुमार को जनता ने नकार दिया था।और उन्हें भाजपा के रहमोकरम और बैसाखी के सहारे छिटक चुकी मुख्यमंत्री की कुर्सी नसीब हुई।
लेकिन चिराग पासवान के इस जख्म को शायद नीतीश कुमार भूल नही पा रहे थे।देशभर मे भद्द पीटने के बाद नीतीश कुमार चिराग पासवान को राजनीतिक रूप से मिट्टी मे मिलाने की कवायद में लगे रहे।इन्होंने लोजपा को तोड़कर पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व मे नई लोजपा पार्टी बनवा दी।पारस को जदयू कोटे के सहारे ही केन्द्रीय मंत्रिमंडल में जगह भी दिलाई। ताकि दलितों के नेता के रूप मे स्थापित किया जा सके।जो हमारे इशारो पर चल सके।पारस को भी चिराग पासवान के देश मे बढ़ते लोकप्रियता और वंशवाद से अलग हटकर नई नीति और नई सोच के साथ राजनीति करना चूभ रहा था।वह अपने पुत्र मुस्कान पासवान को राजनीति में स्थापित करने के लिए व्याकूल थे।ऐसे मे नीतीश कुमार के ऑफर को पारस ठुकरा नही सके और सता एव पुत्र मोह मे दलितों के मसीहा रहे स्व रामविलास पासवान के वर्षो की तपस्या से खड़ी लोजपा को तोडने मे गुरेज नही की।वैसे भी चिराग पासवान अब वंशवाद के तोहमत से ऊपर उठकर भारतीय राजनीति मे एक नया आदर्श प्रस्तुत करना चाह रहे थे।चिराग पासवान तो पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान ही वंशवाद के तोहमत को तोड़ पासवान जाति के एक गरीब परिवार से आने वाले पार्टी के बेहद अनुशासित एवम निष्ठावान कार्यकर्ता संजय कुमार पासवान को हाजीपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ाना चाहते थे।तब भाई पशुपति कुमार पारस के विशेष आग्रह को रामविलास पासवान ठुकरा नही सके।पर चिराग पासवान ने पार्टी मे साफ संदेश तो दे ही दिया था कि वंशवाद पर अब लगाम लगाई जाएगी और टिकट बंटवारे मे पार्टी नेताओ की मनमानी की जगह पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओ को तवज्जो मिलेगी।जिससे पारस के मनसूबे पर पानी फिरते नजर आ रहा था।ऐसे मे पार्टी तोड़ने मे ही पारस को भलाई नजर आई।
हालांकि लोजपा मे हुई टुट से नीतीश कुमार और पारस को ज्यादा फायदा नही हुआ। उल्टे चिराग पासवान के साथ हुई इस भीतरघात से दलित बिरादरी मे इन दोनो नेताओ के प्रति नफरत और चिराग पासवान के प्रति सहानुभूति बढ़ने लगी।लोजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी मे भी 76 मे 66 सदस्य चिराग पासवान के साथ खड़े दिखे।पूरे बिहार मे पासवान जाति तो खुलकर चिराग पासवान के साथ गोलबंद हो, मुखर होने लगी।जिससे सत्तारूढ दल यानी जदयू-भाजपा के पसीने छूटने लगे। जदयू का दांव उल्टा पड गया।25 लाख से भी ज्यादा वोट लाकर लोजपा नेता चिराग ने तो अपनी वजूद पहले ही दिखा दी थी।पशुपति कुमार पारस को दलित वर्ग द्वारा नकारे जाने के बाद जदयू नेताओ को लव- कुश समीकरण की याद आने लगी।उपेन्द्र कुशवाह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की रणनीति के साथ बिहार भर मे घूम-घूम कर लव कुश समीकरण को मजबूत बनाने की कोशिश की गई ।पर लोजपा के रणनीतिकार सौरभ पांडेय के गूगली के आंगे अब सत्तारूढ दल के लोग असहाय महसूस करने लगे।लोजपा ने चिराग पासवान के साध हुए विश्वासघात व कुशासन के खिलाफ बिहार के लोगो से आर्शीवाद मांगने के लिए आर्शीवाद यात्रा की शुरुआत की।आर्शीवाद यात्रा मे लोगों की उमड़ी जन सैलाब को देखकर हर विरोधी दल के होश उड़ गए।क्योकि चिराग पासवान के इस आर्शीवाद यात्रा मे केवल दलित-पिछडें ही नही। बल्कि सवर्ण वर्ग के लोगो की भी अच्छी-खासी भागीदारी देखी जा सकती है।चिराग के इस आशीर्वाद यात्रा मे सवर्णो के नेता के रूप मे मशहूर भूमिहार जाति से आने वाले हुलास पांडेय के नेतृत्व मे सवर्ण वर्ग मजबूती से खड़ा नजर आ रहा है।चिराग पासवान के प्रति सवर्ण वर्ग का बढ़ता झूकाव,सत्तारूढ़ बिहार सरकार (जदयू-भाजपा)के लिए चिंता का विषय बन गया है।सरकार डरी-सहमी सी लग रही है।आनन-फानन मे जदयू ने अपने रणनीति मे बदलाव करते हुए उपेंद्र कुशवाह के जगह भूमिहार नेता ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया। वही भाजपा सवर्ण वर्ग से आने वाले केन्द्रीय मंत्री आर के सिंह के नेतृत्व मे चिराग पासवान के आशीर्वाद यात्रा की देखा-देखी जन आर्शीवाद यात्रा निकाल रही है। मानों ऐसा लग रहा है कि चिराग पासवान के आर्शीवाद यात्रा से पूरी सरकार ही डरी हुई है।अब देखना दिलचस्प होगा कि चिराग पासवान के आशीर्वाद यात्रा के मुकाबले भाजपा और जदयू की रणनीति कितनी कारगर सिद्ध होती है।फिलहाल रोहतास जिले में 28 अगस्त और कैमूर जिले में 29 अगस्त को चिराग पासवान का आगमन होने जा रहा है।


