पुष्पा गुप्ता की रिपोर्ट ;-
डेहरी। रोहतास
वितीय अनियमितता समेत कई अन्य मामलों को लेकर विवादों में घिरा मॉडल स्कूल प्राचार्य व प्रबंध समिति पर उठे सवाल की जांच पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। और यह माना जा रहा है, कि जांच के बाद मॉडल स्कूल से जुड़े कई लोगों की गर्दन फंस सकती है। बताया जाता है कि वर्ष 2012-13 में प्रबंध कारिणी समिति के रहते प्राचार्य आरपी साही ने स्वयं कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। तब उनका वेतन 31 हजार 250 रुपए से बढ़कर 39 हजार रुपए कर दिया गया। जबकि आरोप है कि निर्वाचित सदस्यों में से ही किसी को कोषाध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। ऐसे में उक्त कार्यकाल में नियमों को ताक पर रखकर कार्य करने व वितीय अनियमितता का आरोप लगाकर वर्ष 2018 में विद्यालय के एक अभिभावक ने अधिवक्ता के माध्यम से तत्कालीन डीएम, विद्यालय के प्राचार्य, अध्यक्ष व सचिव को इसके लिए नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। जवाब नहीं मिलने पर मामला हाई कोर्ट तक जा पहुंचा। 6 जनवरी 2020 को हाई कोर्ट के निर्देश पर डीएम पंकज दीक्षित ने तीन सदस्य कमिटी से मामले की जांच कराई। जांच रिपोर्ट में अधिकारियों ने कहा था कि विद्यालय प्रबंध समिति में बहुमत नहीं होने के बाद भी निर्णय लेकर प्रधानाध्यापक को कोषाध्यक्ष बनाना संदेह को जन्म देता है। अंकेक्षण प्रतिवेदन में गंभीर अनियमितता की बात कहते हुए कमिटी ने बृहद जांच की अनुशंसा की थी। तत्पश्चात एक बार फिर डीएम धर्मेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर मॉडल स्कूल मामले की जांच के लिए पांच सदस्य कमेटी का गठन किया गया। डेहरी एसडीएम सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में 5 सदस्य कमेटी ने मामले की जांच शुरू की। अब इस मामले को लेकर वर्तमान व पूर्व प्रबंध समिति सदस्य व अभिभावकों की निगाहें जांच कमेटी पर टिकी हुई है। हालांकि प्रशासनिक जांच को लेकर कई लोगों की धड़कनें भी तेज हो गई हैं। देखना होगा आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे क्या कारवाई होती है। प्रबंध कारिणी के एक सदस्य पर गलत तरीके से पुत्र का अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने, व विद्यालय में पढ़ रहे पुत्र द्वारा सरकारी व निजी दोनों विद्यालयों से लाभ लेने के मामले में कई गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। एसडीएम सुनील कुमार सिंह ने बताया कि डीएम के निर्देश पर मॉडल स्कूल मामले की जांच की गई है जांच कर रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी।
