गौतम कुमार की रिपोर्ट ;-
डेहरी। रोहतास
नगर परिषद चुनाव के करीब 4 वर्ष बीत चुका हैं। ऐसे में अगले वर्ष एक बार फिर नगर परिषद चुनाव होने के पहले मुख्य पार्षद के जाति प्रमाण पत्र विवाद को लेकर स्थानीय विधायक ने आरोप लगाते हुए कहा है कि मुख्य पार्षद ने गलत तरीके से देहरी अंचल से वर्ष 2017 में जाति प्रमाण पत्र बनवाया है। इधर मुख्य पार्षद ने गुरुवार को कई दस्तावेजों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरी जानकारी दी है। बताते चलें कि नगर परिषद की मुख्य पार्षद विशाखा सिंह मूलतः महाराष्ट्र की निवासी है। जहां वह पैतृक परिवार के आधार पर अति पिछड़ा जाति की बताई जाती है। महाराष्ट्र द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र के आधार पर विशाखा सिंह बिहार में वर्ष 2015 के बाद अति पिछड़ा जाति किस श्रेणी में आती है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा निर्गत जाती के आधार पर 7 अप्रैल 2017 को डेहरी की तत्कालीन सीओ सीमा रानी ने भी न्यायालय के शपथ पत्र के आधार पर विशाखा सिंह को अति पिछड़ा जाति का प्रमाण पत्र जारी किया। इसी दौरान अप्रैल 2017 में राजपूतान मोहल्ला निवासी विशाखा सिंह नगर परिषद की चुनाव लड़ी। व मुख्य पद पार्षद के पद पर काबिज हुई। चुनाव मुख्य पार्षद के जाति प्रमाण पत्र को लेकर अधिकारियों से लेकर लोकायुक्त शिकायत की गई थी। तब अनुमंडल प्रशासन ने मुख्य पार्षद पर लगाए गए जातिगत प्रमाण पत्र के आरोप को सिरे से खारिज कर दिया था। जिसके बाद मामला लोकायुक्त पटना तक जा पहुंचा। लोकायुक्त ने इस मामले पर तत्कालीन जिला प्रशासन से जांच रिपोर्ट मांगी थी। जिसमें 13 जून 2017 को जांच प्रतिवेदन में जिला प्रशासन ने अपने लिखित जवाब में कहा था, कि विशाखा सिंह उर्फ विशाखा साठाने महाराष्ट्र में तेली जाति से संबंधित है। जिसे वर्ष 2015 के बाद बिहार में अति पिछड़ा का दर्जा प्राप्त है। प्रशासनिक रिपोर्ट के बाद लोकायुक्त के अधिकारी केसी साहा ने 7 दिसंबर 2018 को दिए अपने निर्णय में मुख्य पार्षद पर लगाए गए आरोप को सिरे से खारिज करते हुए मुख्य पार्षद के जाति प्रमाण पत्र सत्य पाया। मुख्य पार्षद विशाखा सिंह का कहना है, कि विधायक द्वारा लगाए गए आरोप हास्यास्पद व बेबुनियाद है। विकास विरोधी व विकास के मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने वाले कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए बेतुका बयान बाजी कर रहे हैं। जिससे शहर के विकास पर कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है।
