गौतम कुमार की रिपोर्ट ;-
डेहरी /रोहतास
रोहतास जिले के जमुहार स्थित गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित नारायण कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा धान की उन्नत खेती की जानकारी पर आधारित अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। अतिथि व्याख्यान में मुख्य वक्ता डॉक्टर बैजनाथ सिंह, अध्यक्ष अनुसंधान एवं विकास केंद्र ,गोरखपुर ने कहा कि धान की सीधी बुवाई की तकनीक किसानों को काफी लाभ दे रही है ।उन्होंने बाढ़ ग्रस्त एवं सूखा क्षेत्रों के लिए धान की अलग-अलग किस्मों के बारे में जानकारी देते हुए किसानों को बताया कि बाढ़ ग्रस्त इलाकों के लिए स्वर्णा सब वन ,सांबा सब वन ,संभा मसूरी सब वन, कि आर64 सब वन को लगाया जा सकता है। इस कार्यक्रम में लगभग ढाई सौ किसानों ने भागीदारी ली । श्री सिंह ने धान में लगने वाले रोगों के बारे में भी किसानों द्वारा पुछे गए प्रश्नों पर उत्तर देते हुए जानकारी दी एवं आने वाले समय में धान के विभिन्न प्रभेदों की उन्नत खेती को लेकर भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी। वेबीनार की शुरुआत नारायण कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ एस पी सिंह द्वारा स्वागत संबोधन के साथ किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एम एल वर्मा ने बिहार में धान की खेती पर अपना मंतव्य जाहिर किया। इस महत्वपूर्ण वेबीनार में हिस्सा लेते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं सांसद गोपाल नारायण सिंह ने मुख्य वक्ता से आग्रह किया कि बिहार में अभी किसान फसल प्रद्योगिकी के मामले में काफी पीछे हैं इसलिए यहां के किसानों को बहुत सारे किस्म के बजाएं पांच प्रमुख किस्मों से अवगत कराया जाए ताकि कुछ खास किस्म की पैदावार की जानकारी मिले ।और जब इन्हें आदत पड़ जाए तब उन्हें बेहतर बीज ,खाद आदि के बारे में बताते हुए जानकारी दी जाए जिससे कि उनका उत्थान हो सके। उन्होंने किसानों को धान के निर्यात के बारे में भी जानकारी दी तथा बिहार के प्रमुख धान सोनाचूर के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा यदि पादप प्रजनन के माध्यम से सोनाचुर को बौना किया जाए तो किसानों को बेहतर लाभ हो सकता है। धान की सीधी बुवाई की जानकारी मिलने पर किसानों ने मुख्य वक्ता से संबंधित पूछे और अपने सवालों का सीधा उत्तर पाकर संतुष्ट हुए। कार्यक्रम का समापन कृषि विज्ञान संस्थान के डीन डॉ यूपी सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। नारायण कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा आयोजित वेबिनार कार्यक्रम के आयोजन सचिव सहायक प्राध्यापक डॉ प्रशांत विसेन, एवं संयोजक अनिकेता होरो थे। कार्यक्रम में संस्थान के शिक्षक एवं छात्राएं भी शामिल हुए।
