श्मशान घाट पर शव जलाने के लिए भी किया जा रहा है सौदागिरी


 गौतम कुमार की रिपोर्ट ;-

डेहरी /रोहतास 

कोरोना से मृत शव को जलाने के लिए 20,000 रुपए से ₹40000 का होता हैं डिमांड


इस समय जहां मरीजों से हॉस्पिटल में लूट मची हुई है। वही मौत होने के बाद भी शव को जलाने के लिए भी मोटी रकम की मांग श्मशान घाट पर की जा रही है। बताते चलें कि विकट समस्या डेहरी श्मशान घाट की है। वैश्विक महामारी कोविड-19 में, अपने परिजनों के अंत्येष्टि  दाहसंस्कार मे  आए दिन हो रहे सौदागिरी से परेशान शहर के समाज सेवी और बुद्धिजीवी वर्ग ने  अनुमंडल प्रशासन तथा नगर परिषद डेहरी डालमियनगर  से गुहार लगाई है।  इस संदर्भ मे कार्यपालक पदाधिकारी डेहरी डालमियनगर परिषद से पूर्व अध्यक्ष अनुमंडल बार एसोसिएशन के वरीय अधिवक्ता श्री उमाशंकर पाण्डेय उर्फ़ मुटुर पाण्डेय ने वार्ता भी किया और वहाँ के समस्यायों से उन्हें अवगत भी कराया। डेहरी श्मशान घाट की स्वच्छ्ता और आवश्यक सामग्री हेतु दाहसंस्कार के लिए एक उचित मूल्य तालिका के साथ-साथ वहाँ के  स्थानीय धार्मिक और पारंपरिक मुखाग्नि देने के लिए डोम राजा की राशि तय की जाए। जिससे आये दिन  श्मशान घाट पर हो रहे झगड़े और तू तू  मैं मैं को  रोका जा सके। वहाँ पर  मनमानी तरिके से अवैध वसूली पर भी रोक लगाई जा सके। बताते चले की सोन स्थित श्मशान घाट पर दाह संस्कार के लिए शव लेकर आने वाले लोगों से दाह संस्कार के नाम पर उनका मानसिक व आर्थिक शोषण किया जा रहा है। अज्ञात सूत्रों द्वारा बताया जाता है कि श्मशान घाट के समीप उपस्थित डोमो द्वारा लोगों से बीस हजार से चालीस हजार व कभी कभी पांच हजार से दस हजार रुपये तक की मांग, लोगों से मुखाग्नि के लिए की जाती है। हिंदू संस्कृति में ऐसी परंपरा है कि डोमराजा से अग्नि प्राप्त होने से मृत व्यक्ति की मुक्ति होती है। आज बहुत सारे लोगों की  कोरोना महामारी से प्रति दिन मौतें हो रही हैं, और  शमशान घाट पर लूट मची हुई  है। किसी की कोरोना से मृत्यु होने पर अपने परिवार के कोई सदस्य शव को हाथ तक नहीं लगाते हैं इन परिस्थितियों में उनके परिजनों से मोटी रकम की वसूली की जाती है। यह कहते हुए कि इनकी मौत  कोरोना महामारी से हुआ है। हम हाथ नही लगायेंगे। मोटी रकम लेकर शव का डोमो द्वारा दाह संस्कार किया जाता हैं। नही तो दाहसंस्कार हम लोग नही करेगें। ऐसा बोल कर चले जाते है। आप लोग स्वयं कर लीजिए। कहा जाता है कि मरता तो क्या नहीं करता, उन्हें बाध्य हो कर उनके द्वारा मांगी गई रकम से थोड़ी, उची नीची करके देना पड़ता है। हद तो तब हो जाती है, ज़ब अंत्येष्टि करने आए उनके मित्र और परिजनों से भी कही जाती है कि आप लोग भी दिजिए और लोग विवश होकर देते भी है। श्मशान घाट  की साफ-सफाई कभी नहीं  होता है।  गंदगी का अपार अंबार लगा हुआ देखा जा सकता है। जिसके कारण अंत्येष्टि करने वाले लोगों पर संक्रमण फैलने की भी आशंका बनी रहती है। कोरोना महामारी या अन्य व्याधियों से हुई मौत के कारण उनके साथ आए गंदे कपड़े और दवाइयों के कारण भी प्रदूषण फैलने कि आशंका है। बताया जाता है कि कोरोना महामारी से हुई मौत को लेकर अस्पतालों से एंबुलेंस द्वारा सोन नद श्मशान घाट के पास घंटों प्रतीक्षा करना पड़ता है। जिसके पास मोटा रकम नहीं होगा, उसका दाह संस्कार डोमो द्वारा नहीं किया जाएगा। सोन नद घाटों का सफाई नहीं होने के कारण लोगों द्वारा दाह संस्कार के लिए शव को लेकर आने -जाने में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जहां-तहां गंदगी का अंबार लगा हुआ है। श्मशान घाट पर रेलिंग नहीं होने के कारण लोगों को अपना शव लेकर ख़डी सीढ़ी से  उतरने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी तो  बृद्ध लोग सीढ़ी से फिसल कर गिर जाते है। शहर के समाज सेवी डेहरी अनुमंडल विधिज्ञ संघ के पूर्व अध्यक्ष उमाशंकर पांडे उर्फ मुटुर पांडे, अख्तर अंसारी, प्रदीप सिन्हा, धनजी गुप्ता, जय भारतीय सेवा संस्थान के सचिव विनय मिश्रा उर्फ विनय बाबा ने डेहरी नगर परिषद कार्यपालक पदाधिकारी से मांग किया है कि श्मशान घाटों पर नगर परिषद के द्वारा शवो की अंत्येष्टि संस्कार के लिए सामग्रियों पर एक उचित मूल्य निर्धारण किया जाए और श्मशान घाटों पर आने जाने के लिए सोन नदी में उतरने व चढ़ने वालों की  परेशानियों को देखते हुए रेलिंग युक्त सीढ़ी, स्नान घर, ठहरने के लिए कमरे तथा वहाँ पर आए दिन बाईक इत्यादि की हो रही चोरी रोकने के लिए व्यवस्था की जाए। ताकि लोगों को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।