दीपराज की रिपोर्ट ;-
डॉक्टरों की टीम ने बचा ली जान
कहा जाता है कि हौसला बुलंद हो तो यमराज को मत देना कोई मुश्किल काम नहीं है। ऐसा ही एक मामला आज संज्ञान में आया है। 17 साल के युवक ने कोरोना को मात दी है। वो भी तब जब डॉक्टर भी हार चुके थे कि इस युवक को कोरोना से जीत मिलना नामुमकिन है। इस युवक का ऑक्सीजन लेवल 40 और फेफड़ा 90 फीसदी से अधिक संक्रमित हो गया था। आमतौर पर फेफड़े में इतना अधिक संक्रमण होने के बाद रिकवर करना मुश्किल हो जाता है। आईजीआईएमएस में कोविड के नोडल अफसर मनीष मंडल ने बताया कि यह मामला रेयर है। इससे मामले से पता चलता है कि कोरोना से संक्रमित होने वाले मरीज पहले की तरह बिल्कुल ठीक हो सकते हैं। अगर हमलोग आईसीयू नहीं देते, तो वह टेबुल पर जहां एग्जामिन होता है, लड़का वहीं मर जाता। उस समय बस 10 मिनट का समय था उसके पास। लेकिन किस्मत अच्छी थी कि तुरंत एक डेथ हुआ। उस बॉडी को ट्रॉली पर लिया गया और इसे अंदर लेकर दवा स्टार्ट कर ऑक्सीजनेट देना शुरू कर दिया गया। उस समय उसका ऑक्सीजन लेवल 40 पर पहुंच गया था। इसके बाद ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल 80 पहुंच गया। मनीष मंडल ने बताया कि बीमार युवक का दो दिन बाद सीटी स्कैन कराया गया। सिटी स्कैन की जब रिपोर्ट आई, तो हम लोगों का दिमाग घूम गया। यंग लड़का एकदम हट्टा कट्ठा और उसका लंग्स 90 परसेंट फेल, विश्वास ही नहीं हो रहा था। इसके बाद दिल्ली भेज कर उसका ग्रुप रिपोर्टिंग कराया गया। वहां भी वही रिपोर्ट आई। उसके बाद पांच दिन आईसीयू में रहा। मरीज सात दिन आईसीयू में रहा और बाद में तीन दिन वार्ड में रहा। इस दौरान रेमडेसिविर देने की नौबत नहीं आई। वहीं 15 वें दिन वह पूरी तरह ठीक होकर घर चला गया। मौत पर जीत हासिल कर युवक ने बताया कि पॉजिटिव एटीट्यूड से किसी बीमारी पर जीत हासिल की जा सकती है। बीमारी के दौरान डर तो लगा, पर फिर हिम्मत बांध कर आगे बढ़ा। हमारे घर मे कई लोग बीमार हैं। पिता पहले से हॉस्पिटल में भर्ती थे। फिर मेरी तबियत खराब हुई। लेकिन अब मैं फिट हो चुका हूं।
