गौतम कुमार की रिपोर्ट ;-
पश्चिम बंगाल में ममता की जीत के साथ ही ऐसा लगता है, मानो अराजक एवं जिहादी तत्त्वों को हिंसा, लूट, आगजनी, हत्या एवं बलात्कार की खुली छूट मिल गई है। क्योंकि चुनावी मंच से ही ममता बनर्जी ने भाजपा समर्थकों को धमकी दी थी। उसने खुले मंच से कहा था, कि चुनाव बाद जब केन्द्रीय सुरक्षा बल चली जायेगी तब देखुँगी उन्हें कौन बचाता है। साथ ही ममता ने मुसलमानों से भी एकजूट होकर मतदान करने की अपील की थी।
इसी का परिणाम है, कि बंगाल में हजारों की संख्या में हिन्दुओं के घर तोड़े और जलाये जा रहे हैं। उन पर प्राणघातक हमला किया जा रहा है। सैकड़ो की संख्या में रोहिंग्या एवं बंगलादेशी घुसपैठिए तृणमूल के गुण्डों के साथ हथियारों से लैस होकर हिन्दू गाँवों में उधम मचा रहे हैं। युवकों के साथ साथ बच्चे बुढ़े और महिलाओं पर भी लाठी डंडों और घातक हथियारों से हमला किया जा रहा है। महिलाओं की बलात्कार के बाद हत्या की जा रही है। यह सब सरकार और प्रशासन के संरक्षण में हो रहा है। ऐसा लगता है, कि ममता बनर्जी के चुनाव जीतते ही कानून का राज समाप्त हो गया है। बंगाल के हिन्दू जान बचाने के लिये भागकर असम एवं अन्य पड़ोसी राज्यों में शरण ले रहे हैं। ममता के गुण्डों का साहस इतना बढ़ गया है, कि आज गृह राज्य मंत्री के काफिले पर भी हमला हो गया। उनके वाहन चालक का सिर फट गया।
यह बहुत ही विषम स्थिति है। बंगाल के अनेकों के द्वारा प्रतिदिन त्राहिमाम संदेश आ रहे हैं। यह स्थिति निंदनीय तो है ही। स्वतंत्र भारत में एक मुख्यमंत्री के द्वारा इस प्रकार नरसंहार को प्रयोजित और प्रोत्साहित करने की घटना बिल्कुल अप्रत्याशित है। ऐसे अपराधी मुख्यमंत्री और दोषी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई होनी चाहिए। बंगाल के उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय को भी इस अभूतपूर्व अराजकता पर संज्ञान लेना चाहिए। केन्द्र सरकार को भी और कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है। विश्व हिन्दू परिषद इस हिंसा पर मूकदर्शक नहीं रह सकता है। कोरोना की परिस्थितियों में भी हर संभव माध्यम से बिहार में इसके विरुद्ध पूरी ताकत से आंदोलन किया जायेगा।
बिहार के बंगाल से सटे जिलों में आनेवाले हिन्दुओं के आवास आदि की व्यवस्था की जायेगी।
