ब्लैक फंगस से जिले में हुई पहली मौत 15 दिन से इलाज रत डेहरी की शिक्षिका का बनारस में मौत


 कमलेश कुमार की रिपोर्ट ;-

डेहरी। रोहतास 

वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के बढ़ने के साथ ही राज्य में लागू लॉक डाउन के बाद संक्रमण धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। किंतु अब नए रूप से शुरू ब्लैक फंगस नामक रोग कोरोनावायरस से भी अधिक घातक साबित होने लगा। 15 दिन से ब्लैक फंगस की शिकार शहर की एक शिक्षिका का इलाज के दौरान बुधवार की सुबह बनारस में निधन हो गया। इस खबर से चिकित्सकों के साथ-साथ आम लोगों की चिंताएं बढ़ गई है। क्योंकि ब्लैक फंगस ने अपना पांव जिले में पसारना शुरू कर दिया है। बताया जाता है, कि मृतिका 52 वर्षीय तनीमा मित्रा शहर के एक निजी विद्यालय में बताओ शिक्षिका कार्य करती थी। जबकि पति विजय मित्रा वेयरहाउस में भभुआ जिले में कार्यरत है। उत्तर प्रदेश के बनारस की मूल निवासी पाली रोड में वर्षों  रहने वाले मृतिका के पति ने बताया कि 28 अप्रैल को तबीयत खराब होने के बाद उसे डेहरी के निजी क्लीनिक में इलाज कराया गया। जहां चिकित्सकों ने बेहतर इलाज हेतु वाराणसी रेफर कर दिया। बनारस के एक निजी क्लिनिक में इलाज कराने के दौरान चिकित्सकों ने जानकारी दी कि मृतिका ब्लैक फंगस की शिकार हो गई है। आंखों के पास काले-काले धब्बे के अलावे शरीर के अन्य स्थानों पर धब्बा होने लगा। और धीरे-धीरे या तेजी से बढ़ने लगा।हालांकि मृतिका के परिजनों को यह उम्मीद भी नहीं थी, कि ब्लैक फंगस कोरोना संक्रमण से भी अधिक खतरनाक है। करीब 15 दिनों के इलाज के बाद मंगलवार की रात तबीयत अधिक बिगड़ने लगी। और बुधवार की सुबह चिकित्सकों ने इजाजत शिक्षिका को मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की सूचना से शिक्षा जगत से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। साथ ही चिकित्सक भी इस बात से चिंतित नजर आने लगे, कि कहीं ब्लैक फंगस का संक्रमण धीरे-धीरे अन्य लोगों को भी चपेट में ना लेने लगे। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अनुज चौधरी ने बताया कि कोरोना पॉजिटिव के दौरान आवश्यकता से अधिक मरीज द्वारा दवा लेने पर ब्लैक फंगस का खतरा बना रहता है। हालांकि ब्लैक फंगस को लेकर विभाग की ओर से अभी किसी तरह का कोई निर्देश या कोई जानकारी नहीं आई है। जानकारी मिलने पर अग्रतर कार्रवाई की जाएगी