ज्योतिबा फूले महान समाज सुधारक थे:- विनय चंचल



गौतम कुमार की रिपोर्ट ;-


 डेहरी/रोहतास 

सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महामानव ज्योतिबा फुले के जयंती पर उन्हें नमन करते हुए पथ निर्माण  विभाग के कार्यपालक अभियंता विनय चंचल ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले 19वीं सदी के एक महान समाज सुधारक,विचारक, समाज सेवी, लेखक, दार्शनिक थे। देश में सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महात्मा ज्योतिबा फुले ने गरीब, पिछड़े, दलित एवं शोषित वर्ग के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।वहीं रेलकर्मी,लेखक व समाजसेवी बीरेन्द्र पासवान ने कहा कि ज्योतिबा फूले उन्नीसवीं सदी की एक महान ज्योति थे।जो आज भी उत्पीडित मनुष्यता को रास्ता दिखा रहे हैं और आंगे भी दिखाते रहेंगे बिहार पुलिस मेंस एसोसिएशन के महामंत्री जनार्दन पासवान के मंत्री जनार्दन पासवान एवं एससी-एसटी कर्मचारी संघ डेहरी के अध्यक्ष शशि कुमार ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फुले का जन्म 1827 ई. में पुणे में हुआ था। उनका परिवार कई पीढ़ी पहले सतारा से पुणे आकर फूलों के गजरे आदि बनाने का काम करने लगा था। इसलिए माली के काम में लगे ये लोग ‘फुले’ के नाम से जाने जाते थे। ज्योतिबा ने कुछ समय पहले तक मराठी में अध्ययन किया, बीच में पढाई छूट गई और बाद में 21 वर्ष की उम्र में अंग्रेजी की सातवीं कक्षा की पढाई पूरी की।

इनका विवाह 1840 में सावित्री बाई से हुआ, जो बाद में स्‍वयं एक मशहूर समाजसेवी बनीं। दलित व स्‍त्री शिक्षा के क्षेत्र में दोनों पति-पत्‍नी ने मिलकर काम किया। ज्‍योतिबा फुले भारतीय समाज में प्रचलित जाति आधारित विभाजन और भेदभाव के खिलाफ थे। ज्योतिबा की संत-महात्माओं की जीवनियां पढ़ने में बड़ी रुचि थी। उन्हें ज्ञान हुआ कि जब  सब नर-नारी समान हैं तो उनमें ऊँच-नीच का भेद क्यों होना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मदन चंद्रवंशी ने कहा कि विधवाओं और महिलाओं के कल्याण के लिए काफी काम किया। उन्होंने इसके साथ ही किसानों की हालत सुधारने और उनके कल्याण के लिए भी काफी प्रयास किये।युवा दलित युवा व्यवसायी व कार्यक्रम के संचालन कर्ता संजय पासवान ने कहा कि  स्त्रियों की दशा सुधारने और उनकी शिक्षा के लिए ज्योतिबा ने 1848 में एक स्कूल खोला। यह इस काम के लिए देश में पहला विद्यालय था। लड़कियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नहीं मिली तो उन्होंने कुछ दिन स्वयं यह काम करके अपनी पत्नी सावित्री बाई को इस योग्य बनाया।

कार्यक्रम को अरुण रावत,लल्लू चौधरी ,जयप्रकाश पासवान, पूर्णवासी राम, संजयच॔द्रवंशी,काश्मीर पासवान,सुजीत कुमार, जय शंकर पासवान,अजय पासवान,मुना पासवान सहित कई प्रमुख लोगों ने सम्बोधित किया। इस अवसर पर भारत रत्न डॉ भीम राव अम्बेडकर की  131वी जयंती भी 14 अप्रैल को डेहरी के एनीकाट न्यूट्रीशन सेन्टर टालवास में सादगीपूर्ण ढंग से कोविड 19के संदर्भ में बिहार सरकार के गाइड लाइन को ध्यान में रखते हुए मनाने का फैसला किया ।