सामाजिक विकास में रंगमंच की बहुत बड़ी भूमिका:- राणा अवधूत


 गौतम कुमार /के बीरेन्द्र। 

डेहरी(रोहतास)। समाज को जागृत करने व सामाजिक सरोकारों से रूबरू कराने में रंगमंच की बहुत बड़ी भूमिका होती है। रंगमंच को सामाजिक चेतना का सूत्रधार भी माना जाता है।जिससे समाज में फैले कुरीतियों का दमन कर विकास की रौशनी फैलाने में मदद मिलती है। उक्त बातें शनिवार की देर शाम अभिनव कला संगम द्वारा हिन्दी रंगमंच दिवस पर आयोजित विचार गोष्ठी 

को सम्बोधित करते हुए भोजपुरी के जाने माने साहित्यकार व पत्रकार राणा अवधूत ने कही।

उन्होंने कहा कि रंगमंच वास्तविकता का आईना होता है,जो समाज में घटित घटनाओं का चित्रण कर सच्चाई के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करता है। वही वर्तमान परिवेश में रंगमंच का महत्व विषय पर अपनी विचार रखते हुए चर्चित व्यंग्यकार व साहित्कार ब्रजेश सिंह ने कहा कि रंगमंच जीवन का वास्तविक चित्रण कर लोगो को वास्तविकता से रूबरू कराने का कार्य करता है। वर्तमान समय में रंगमंच में छा रहे सन्नाटे मैं आवाज भरने का काम अभिनव कला संगम जैसी संस्था करती है। मनुष्य का जीवन भी एक रंगमंच है।वर्तमान युवा पीढ़ी को भौतिकतावाद के भटकाव के बजाय रंगमंच से जुड़ना चाहिए। रंगमंच संस्कृतियों को जोड़ने का कार्य करती है। देश कि संस्कृति को बचाने का सबसे उत्तम माध्यम रंग मंच है। देश के लोगो को अपने अपने संस्कृति से रूवरू कराने व जोड़ने का कार्य  रंगमंच ही करता है।आज की तड़क-भड़क भरी दुनिया में भी रंग मंच देश की संस्कृति तथा सभ्यता के प्रस्तुति का सबसे बड़ा विश्वसनीय मंच माना जाता है। 

गोष्टी में कवि रामनाथ सिंह, साहित्यकार बिट्टू कुमार, नंदन कुमार आदि ने भी अपना विचार रखा। अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष कौशलेंद्र कुशवाहा, संचालन महासचिव कमलेश कुमार व धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष शशि श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर डेहरी अनुमंडल विधिक संघ अध्यक्ष रमाकांत दुबे, मनोज अज्ञानी, बृजमोहन सिंह, संस्था निदेशक प्रो रणधीर सिन्हा, इंद्र कुमार बाघा, संतोष नीरज, संजय यादव, कुंदन यादव, संजय सिंह, विजय चौरसिया, शंभू गुप्ता, रवि तिवारी, उर्मिला देवी समेत कई लोग उपस्थित थे।