वर्षों से झूठे वादों पर चल रहा है रेल कारखाना निर्माण का मामला।रेल कारखाना खोलने को लेकर एक बार फिर होने लगी आंदोलन की सुगबुगाहट


कमलेश कुमार  की रिपोर्ट 

केंद्रीय बजट में रेल कारखाना के लिए मिला मात्र पांच करोड़ रुपया

डेहरी। रोहतास

डालमियानगर में प्रस्तावित रेल वैगन मरम्मत कारखाना के चालू होने की उमींदो को फिलहाल आम बजट और राइट्स से झटका लगा है। जिस कछुए की चाल से रेल मंत्रालय और राइट्स चल रहे हैं, लगता नहीं कि रेल वैगन कारखाना बनकर तैयार हो जाएगा।  रेलवे ने 290.45 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली रेल वैगन मरम्मत कारखाना लगाने के लिए वर्ष 2020 के रेल बजट में मात्र 38 करोड़ का प्रावधान किया था। लेकिन इस बार मात्र 5 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो यह रकम ऊंट के मुंह से जीरा के समान है। जिससे साफ समझा जा सकता है, कि फिलहाल कारखान लगना मुश्किल है। म॔त्रालय और राइट्स के तरफ से इस प्रस्तावित रेल कारखाना के प्रति बेरूखी ऐसी कि कबाड़ हटाने वाली क॔पनी चिनार स्टील सिंगमेंट प्राईवेट लिमिटेड को कबाड़ हटाने की जिम्मेदारी  31जनवरी 21तक सौंपी गई थी।जिसने अपनी तयसीमा के अंदर डालडा प्लांट, फाईवर,पेपर, पावर,एलबेस्टर,सीमेंट तथा स्टील फैक्ट्री को पूरी तरंह कबाड़ मुक्त कर किया। लेकिन बेवजह 31मार्च 21 तक उसे समय विस्तार दिया गया है।ताकि बेवजह मामला को टाला जा सके।  लेकिन राइट्स और कबाड़ हटाने वाली क॔पनी के बीच मामला उलझता जा रहा है। संभावना तो यह भी व्यक्त की जा रही है कि  इनका विवाद न्यायालय तक भी पहुँच सकता है।   

 रेलमंत्रालय का अनुवांशिक इकाई  रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनोमिक सर्विस लिमिटेड(राइट्स)भारत सरकार नई दिल्ली  के उप महाप्रबंधक राजेश कटोरिया ने गत दिनों  कारखाना का निरीक्षण किया और कंपनी के द्वारा हटाए गए कबाड़ का जायजा लिया था  ।तब कबाड़ हटाने वाली क॔पनी चिनार के साईड इंचार्ज कमलेश मितल ने दावा किया था कि राइट्स को हैंड ओवर करने के लिए तैयार है। 

रेलवे फ़िलहाल इस कारखाने के लिए पार्टवाईज निविदा भी निकाल रहीं हैं। लेकिन किसी भी कार्य एजेंसी के साथ अनुबंध का फैसला नहीं ले पा रही हैं। वजहे चाहे जो भी हो लेकिन कुल मिलाकर मामला रेल कारखाना खोलने की नहीं, बल्कि टालने का ही दिखाई दे रहा है। 

बता दें कि तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने रोहतास उधोग समूह के 220 एकड जमीन को 140 करोड़ में खरीद कर भुखमरी से दम तोड़ रहे लोगों के बीच खूशी की लहर पैदा कर दी थी। लोगों को तब लगा था कि रेल कारखाना खोले जाने से बेरोजगारी दूर होने हो जाएगी। लेकिन मौजूदा केन्द्र सरकार  की दिलचस्पी नहीं होने तथा चुनावी मौसम में बयानवीर नेताओं के झेठ  वादे के राजनीतिक तपिश में झूलसकर खाक होती  उमीदें किसी चमत्कार के इंतजार में है। कई लोगों ने रेल कारखाना खोलने को लेकर 4 वर्षों से कई प्रकार की अफवाहें भी फैला रहे हैं। इधर कई संगठनों ने एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करने का ऐलान कर दिया है।

इस स॔दर्भ में राइट्स के उपमहाप्रबंधक राजेश कटोरिया ने कहा है कि डालमियानगर रेल वैगन कारखाना निर्माण के लिए राइट्स प्रयासरत है, तथा कई चरणों में निविदाएं निकाली गई है। फिलहाल इनके कागजों का अध्ययन किया जा रहा है। इसी बीच कबाड़ हटाने वाली क॔पनी को 31 मार्च 2021तक समय दिया गया है कि वे कबाड़ और मलवे को समय-सीमा के अंदर निश्चित तौर पर हटा लें। इधर डेहरी के विधायक फतेह बहादुर सिंह ने केंद्र की गठबंधन सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि एनडीए सरकार की नीयत लोगों की बेरोजगारी दूर करने की नहीं है। बल्कि चुनाव में रेल कारखाना के नाम पर लोगों को गुमराह करने की रही है। इनके सांसद, विधायक तो दूर खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वादे के बाद भी रेल कारखाना डालमियानगर का निर्माण नहीं होना यह दर्शाता है कि भाजपा झूठे सब्जवाग दिखाकर लोगों को केवल ठगने का काम करती है।