डेहरी से रविंद्र कुमार की रिपोर्ट ;-
महंगाई संभाले नहीं संभल रही है आम लोग जिंदा रहने के लिए क्या जतन करें यह भी तो तक तय नहीं कर पा रहे वैसे तो ज्यादातर लोग सब्जी रोटी चावल दाल ही खा कर अपने जीवन को आगे बढ़ाते हैं पर अब तो गरीब को छोड़िए आम लोग भी अपनी थाली नहीं सजा पा रहे हैं उनकी भी थाली सूनी पड़ने लगी है सब्जी मार्केट जाइए तो क्या भिंडी क्या करेला क्या लौकी क्या बैगन नेनुआ हो या झींगे सभी के दाम ₹40 प्रति किलो के पार 100 के करीब पहुंचने को है हालत यह है कि हरा सब्जी की बात भर सोचने से पहले लोगों को अपनी बजट की चिंता सताने लग रही है, रही बात आलू की तो वह भी ₹36 से ₹40 प्रति किलो के भाव से तो प्याज 48 से ₹50 प्रति किलो लहसुन का भाव है सैकड़ा पार तो साग भी 60 से ₹80 रुपए प्रति किलो के भाव से बाजार में बिक रहा है पर जिनके हाथ में बागडोर है उन्हें तनिक भी इसकी चिंता नहीं है कि इसे कैसे कंट्रोल किया जाएगा जिससे लोगों को राहत मिल सके लोग समझ नहीं पा रहे है यह क्या हो रहा है ऐसी हालत में अपनी जीवन को कहां तक बचा पाएंगे इतना ही नहीं दाल भी सैकड़ा पार कर गई है हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ती चली जा रही है आम लोगों की थाली में सूखी रोटी और बमुश्किल चावल नजर आने लगी हैं जिससे लोग जैसे तैसे खाने को मजबूर होने लगे हैं शहरवासी अवध किशोर चौधरी विजय कुमार संजय चौधरी योगेंद्र कुमार जयप्रकाश श्रीधर पाठक दीपक कुमार आदि का कहना है कि पहले से व्यापार की वित्तीय हालात कुछ अच्छी नहीं है कोरोना वह बंदी के कारण तो कमर ही टूट गई है अब महंगाई से बेमौत मर ने जैसे हालत है वही विक्रेता महंगी सामान मिलने का वर्तमान रेट पर बेचने को अपनी मजबूरी बताने में लगे हुए हैं
वर्तमान में बिक्री रेट
आलू 36 से ₹40 प्रति किलो प्याज 48 से ₹50 प्रति किलो भिंडी 40 से ₹50 प्रति किलो नेनुआ ₹60 प्रति किलो बैगन ₹60 प्रति किलो परवल ₹80 प्रति किलो लौकी ₹40 प्रति किलो करेला ₹60 प्रति किलो झींगे ₹60 प्रति किलो टमाटर ₹80 प्रति किलो के भाव से बिक रहा है
