गौतम कुमार शर्मा
सासाराम/रोहतास
बिहार किसान सलाहकार संघ युवा कमिटी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अमित कुमार सिंह का कहना है कि सरकार जिस तरह से किसान सलाहकारों के मांगो को नजर अंदाज करते हुय अपमानित करने का कार्य कर रही है इसे कतई बर्दाश्त नही किया जाएगा।इसे लेकर सभी सलाहकार परिवारों में काफी रोष एवं नाराजगी है।सलाहकार संघ का कहना है कि बिगत दिनों में अभ्यावेदन के माध्यम से मांगो को लेकर सरकार को समय समय पर अवगत कराने का कार्य किया गया।बिभाग एवं सरकार की ओर से आश्वाशन देते हुए आश्वश्त किया गया कि आपलोगो के जायज मांग पूरे किये जायेंगे। जिसे लेकर त्रिस्तरीय समिति का गठन किया गया लेकिन त्रिस्तरीय समिति के निर्णयों को लागू न करना सरकार एवं विभाग की ढुलमुल रवैया को दर्शाता है इसे नजर अंदाज करना किसान सलाहकारो को रास नही आ रहा है। और इसे राज्य के किसान सलाहकार अपमानित एवं ठगा महसूस कर रहे है विभाग ने किसान सलाहकार की कार्यावधि मात्र 6 घण्टे निर्धारण कर अंशकालिक कर्मी तो घोषित कर दिया लेकिन बिगत दस बर्षो से पूर्णकालिक सरकारी कर्मी की तरह कार्य लेते आ रही है।जैसे चुनाव ,जनगणना ,पशु गणना, राशन किराशन वितरण, सहकारिता बिभाग की धान गेंहू, अधिप्राप्ति, फसल जांच कटनी, स्वच्छ भारत मिशन, इत्यादि तमाम अन्य सभी कार्य लेने के बाद भी इन्हें पूर्णकालिक कर्मी नहीं मानना इनकी मूल जायज मांगो से इन्हें उपेक्षित रखना दोहरी मानसिकता को दर्शाता है।यहाँ तक कि इन्हें कर्मचारी भबिष्य निधि से भी वंचित रखने का कार्य किया गया है जिसे सलाहकार भबिष्य में आने वाले चुनौतियों को हर तरह की खतरे से निपटने में अपने आप को पूरी तरह से असमर्थ एवं असहाय महसूस करने लगे है।माननीय मुख्यमंत्री जी की ड्रीम प्रोजेक्ट हर खेत पानी की सर्वेक्षण का कार्य भी सलाहकारो को बिना एंड्रायड मोबाइल दिए पूरी तरह से शोषित कर कराने का कार्य यह कहकर किया गया कि आपलोग इसे पूरा कर दे तो आपलोगो की मांग पूरा कर लिया जाएगा।कार्य लगभग शत प्रतिशत पूर्ण होने को है लेकिन सरकार एवं बिभाग ने मात्र 1000 रु मानदेय के रूप में बढ़ाकर सलाहकारो को सिर्फ और सिर्फ धोखा देने एवं अपमानित करने का ही कार्य किया है। जिससे प्रदेश के 6400 किसान सलाहकार भबिष्य को लेकर चिंता जाहिर करते हुय अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे है। यदि अधिसूचना जारी होने से पूर्व त्रिस्तरीय कमिटी के रिपोर्ट सरकार लागू नही करती है तो इस चुनावी वर्ष में इसका खामियाजा सरकार को निशिचित रूप से भुगतना पड़ जायेगा।
