तिलौथू के हैकर ने सरकार की उड़ाई नींद।फर्जी तरीके से राज्य के एक लाख किसानों का क्षतिपूर्ति आवेदन किया ऑनलाइन।डेहरी से पटना तक दौड़ लगा पुलिस ने दो हैकर को किया गिरफ्तार

 कमलेश कुमार
डेहरी/ रोहतास
साइबर क्राइम को अंजाम देने वाले हैकर अब किसी आम आदमी को नहीं बल्कि सरकारी खजाने को चपत लगाने के फिराक में है। ताकि वाह साइबर क्राइम के तहत सरकार के खजाने को खाली कर सकें। बिहार में पहली बार ऐसा एक मामला प्रकाश में आया है, जिसने सरकार की नींद उड़ा दी। सरकार के निर्देश पर कृषि विभाग द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के आधार पर जिला पुलिस ने पटना टीम भेजकर हैकर की पूरी जानकारी ली तथा जानकारी के आधार पर तिलौथू निवासी दो हैकर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बताया जाता है कि एक हैकत नए साइबर क्राइम के तहत कृषि विभाग के बेवसाइट पर फर्जी तरीके से रोहतास जिला समेत बिहार के कई राज्यों के लाखों किसानों का डाटा हैक कर क्षतिपूर्ति हेतु फर्जी तरीके से कृषि विभाग में आवेदन सबमिट कर दिया। कृषि विभाग में वैसे लाखों किसानों के आवेदन भी सबमिट हो गए और अब खजाना खाली ही होने वाला था, कि इसकी भनक कृषि विभाग को मिली। विभाग ने तत्परता बरतते हुए विभाग ने इसकी जानकारी रोहतास के जिला कृषि पदाधिकारी को दी। और कृषि पदाधिकारी के लिखित आवेदन पर तिलौथू निवासी तिलौथू थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। जिसमें दो हैकर की गिरफ्तारी अब तक हो चुकी है।
क्या है पूरा मामला-- हाल ही में राज्य में हुई आंधी तूफान व ओलावृष्टि से लाखों किसानों के फसलों की बड़े पैमाने पर क्षति हुई थी। तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की थी, की किसान ऑनलाइन आवेदन करें। जिसके बाद उन्हें क्षतिपूर्ति मुआवजा दिया जाएगा। इसी आधार पर किसानों को विभाग के वेबसाइट पर कॉलम अनुसार आवेदन भरकर आवेदन सबमिट करना था। आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन पूरा होने के बाद किसान का मोबाइल नंबर वेबसाइट पर डाला जाता था। मोबाइल पर आए ओटीपी को ऑनलाइन आवेदन में सबमिट करने के बाद ही कृषि विभाग में आवेदन स्वीकृत होता है। किंतु साइबर अपराधी एक हैकर ने एक सॉफ्टवेयर डेवलप कर विभाग के वेबसाइट को ही हैक कर लिया।
कृषि विभाग का खजाना हो जाता खाली-- कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले के तिलौथू निवासी शुभम कुमार नामक एक है करने खुद से एक सॉफ्टवेयर डेवलप किया जिसके तहत बिना ओटीपी के राज्य के करीब डेढ़ लाख किसानों के डाटा को हैक कर क्षतिपूर्ति हेतु आवेदन सबमिट कर दिया। और उक्त आवेदन को कृषि विभाग द्वारा स्वीकृत कर लिया गया। उक्त आवेदन के आधार पर कृषि विभाग के करोड़ों रुपए का वारा न्यारा हो सकता था। इसी बीच कृषि विभाग को किसी माध्यम से यह जानकारी मिली की विभाग के वेबसाइट को हैक कर हैकर द्वारा खुद के सॉफ्टवेयर से सरकार को ही चुना लगाने का प्रयास किया गया है। हैरत में पड़े विभाग ने जांच कराई तो पता चला कि उक्त हैकर रोहतास जिले से संबंधित है। तत्परता दिखाते हुए विभाग ने इसकी सूचना जिला कृषि पदाधिकारी को दी। करीब टी दिनों तक रोहतास जिला पुलिस व प्रशासन से लगातार संपर्क कर व सभी बातों की जानकारी देने के बाद यह पता लग सका कि उक्त हैकर तिलौथू का निवासी है। जिला पुलिस प्रशासन इस मामले को इतने गोपनीय तरीके से जांच कर रहे थे, कि इसकी भनक खुद पुलिस या कृषि विभाग के कनीय पदाधिकारी को भी पता नहीं चल सका था। कृषि विभाग की माने तो उक्त हैकर द्वारा एक गिरोह संचालित किया जाता है। तथा ऑनलाइन प्रोसेस डॉट कॉम के माध्यम से शुभम कुमार द्वारा हैकरों को प्रशिक्षित भी किया जाता है। 
सक्रिय होकर पुलिस ने की कार्रवाई--इस बड़े मामले में  जिला कृषि विभाग के साथ-साथ  राज्य कृषि विभाग को भी हैरत में डाल दिया है। साथ ही साइबर क्राइम से जुड़े अधिकारियों के लिए भी यह घटना चुनौती बन चुकी थी। ऐसे में जिला कृषि पदाधिकारी राधिका रमण के लिखित आवेदन पर तिलौथू थाने में हैकर शुभम कुमार वह उसके अन्य साथियों पर प्राथमिकी दर्ज की गई। दर्ज प्राथमिकी के आधार पर एएसपी संजय कुमार ने एक पुलिस टीम गठित कर पटना साइबर क्राइम मुख्यालय भेजा। पटना से पूरी जानकारी व सबूत इकट्ठा करने तथा हैकर की पूरी जानकारी लेने के बाद पुलिस ने सर्विलांस के आधार पर तिलौथू निवासी साइबर अपराधी शुभम कुमार और अजीत कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। तथा इससे जुड़े उसके अन्य साथियों की तलाश में जुट गई है।
कहते हैं अधिकारी--- एएसपी संजय कुमार का कहना है, कि जिला कृषि पदाधिकारी के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की बारीकी से जांच की जा रही है। नामजद अभ्युक्त की गिरफ्तारी कर पूछताछ की गई है।  पूछताछ के आधार पर उससे जुड़े अन्य लोगों को भी पुलिस चिन्हित कर कार्रवाई करेगी।