लाखों का हुआ घाटा |

गौतम कुमार शर्मा
डेहरी /रोहताश
मुरझाए फूलों की खेती करने वाले किसानों के चेहरे पर छाई उदासी, लाखों का हुआ घाटा
रोहतास जिले के डिहरी  प्रखंड अंतर्गत भरकुरिया गांव में लगभग 80 बीघा भूमि में यहां के किसान फूलों की खेती करते हैं. लेकिन इस बार खेत में फूल खिल कर फिर मुरझा गए हैं.
 इस लंबे लॉकडाउन में सबसे अधिक घाटा किसानों को होता दिख रहा है. रोहतास  जिले के डिहरी  प्रखंड अंतर्गत भरकुरिया गांव में लगभग 80 बीघा भूमि में यहां के किसान फूलों की खेती करते हैं. लेकिन इस बार खेत में फूल खिल कर फिर मुरझा रहे हैं. इन फूलों का कोई खरीददार नहीं है. भले ही यहां के फूलों का लहराता खेत मनोरम दृश्य प्रकट करता हो. लेकिन यह खेत अब फूल उत्पादन किसानों  के लिए काल बन गया है. क्योंकि इन फूलों का अब कोई खरीदार नहीं है. माना जा रहा है कि यहां के हर एक किसान को दो से तीन लाख का घाटा हुआ है. किसान कहते हैं कि कई जगह लगातार फोन कर रहे हैं कि फूल ले लिया जाए. लेकिन इस फूल का ओने पौने दाम में भी कहीं कोई खरीददार नहीं मिल रहा है.
शादी-विवाह तथा मंदिरों के बंद रहने से नहीं मिल रहे है खरीदार
इन दिनों मंदिर, मजार, गुरुद्वारा, सामान्य समारोह यहां तक की शादी-ब्याह भी बंद है. जिस कारण सारी मेहनत तो बर्बाद गई, साथ ही पूंजी का भी नुकसान हुआ है. इस मौसमी खेती से हर साल भरकुरिआ के किसान लाखों कमाते थे. लेकिन इस बार किसान बर्बाद हो गए. शादी- विवाह के लग्न के मौसम के लिए किसान फूल को किसी तरह बचा कर रखे थे. यह सोचकर कि उनके फूलों की बिक्री होगी तो लाभ मिलेगा. लेकिन अब सब बेकार हो गया है. फूल खेत में ही सुख कर झड़ रहे हैं और इसका कोई खरीदार नहीं है.
क्या कहते हैं किसान?
भरकुरिया में फूल की खेती करने वाले किसान अमित कुमार, प्रेमचंद सिंह ने बताया कि सिर्फ एक गांव में 80 बीघा से अधिक खेतों में फूल की खेती का उत्पादन होता है. पिछले 10 सालों से इस नगदी फसल से उन लोगों को बहुत फायदा हुआ. इस बार फूल खिल कर तैयार है. लेकिन कोई खरीदार नहीं रहने से उनके फूल खेत में ही सुख कर झड़ रहे हैं. यूं कहे कि फूल के पंखुरी के साथ उनके सपने भी जमीन में गिरकर बर्बाद हो रहे हैं. बड़े जतन से ओलावृष्टि से बचाकर इन फूलों को रखा गया था. लेकिन जिन फूलों के पौधे को किसान आसमानी पत्थर से बचा लिया. लेकिन वायरस की मार ने उन किसानों को कहीं का नहीं छोड़ा.
फसल से 35 से 40 लाख के बीच हुआ नुकसान
यहां के किसानों का कहना है कि 80 बीघे में लगे इस फसल से 35 से 40 लाख का नुकसान हुआ है. दरअसल, इन किसानों ने उन्नत किसानी का प्रशिक्षण लिया था. इसके बाद पारंपरिक खेती को छोड़कर नगदी खेती की ओर रुख किया. लेकिन इस विपत्ति के घड़ी में उन लोगों को बहुत घाटा हो रहा है. इस फूल का कोई खरीदार नहीं है. ऐसे में धान-गेहूं के पारंपरिक खेती छोड़ना उन लोगों को महंगा लग रहा है. ऐसी कोई उपाय भी नहीं है कि इन फूलों को कुछ दिन तक बचा कर रखा जाए.
क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी राधारमण कहते हैं कि फुल उत्पादक किसानों को भारी क्षति हुई है. जल्द ही इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी. सरकार का जो भी निर्णय होगा, उसे लागू किया जाएगा और किसानों को राहत पहुंचाने की कोशिश की जाएगी.