गौतम कुमार शर्मा
डेहरी/ रोहतास
निजामुद्दीन मरकज की घटना अत्यन्त शर्मनाक और दुर्भाग्यजनक है। ऐसा लगता है कि कोरोना वायरस के विरुद्ध पिछले 18 दिनों के संघर्ष और लाकडाउन की उपलब्धियों पर यह घटना पानी फेर सकता है। इस्तेमा के नाम पर दुनिया के 25 देशों और भारत के तब्लीगी यहाँ हजारों की संख्या में कई दिनों से एकत्रित थे। अब इस्लाम के प्रचार के लिए इनमें से 15 सौ से अधिक भारत के कई राज्यों की मस्जिदों में छिपे बैठे हैं। इनमें से 400 से ज्यादा पकड़े जा चुके हैं। पकड़े गए कई मौलवी कोरोनाग्रस्त पाए गए हैं। केरल से कश्मीर तक इन मौलवियों द्वारा संक्रमण फैलाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। ऐसा लगता है कि अब निजामुद्दीन मरकज कोरोना नामक भूकंप का केन्द्र बन चुका है। उक्त बातें बजरंग दल के जिला संयोजक गोपी कुमार में प्रेस बयान जारी कर कही है।
उन्होंने कहा है, कि मरकज के पदाधिकारी अपने अक्षम्य अपराध को ढकने के लिए प्रशासन व पुलिस को उत्तरदायी ठहराने का दुस्साहस कर रहे हैं।
पिछले दिनों देश के तथाकथित सेकुलर बुद्धिजीवियों ने शाहीन बाग जैसे स्थानों पर जाकर उनका व देशव्यापी हिंसा का समर्थन किया था। उनकी इस घटनाक्रम पर चुप्पी आश्चर्यजनक है। उनसे हमारी अपील है कि वे अपने प्रभाव का उपयोग कर इस प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगाए। विश्व हिन्दू परिषद सह बजरंग दल केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों से अपील करती है, कि मरकज, मस्जिदों व मदरसों में छिपे इन तत्वों को बाहर निकालने की जगह उनकी इमारतों को ही क्वारेंटाइन करके वहीं उनका इलाज किया जाए, जिससे यह महामारी वहीं तक सीमित रहे।
जो विदेशी मुल्ला मौलवी टूरिस्ट वीजा लेकर यहाँ कट्टरपंथ के प्रसार के लिए आए हैं, उनका वीजा रद्द कर उन पर सख्त कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए।कोरोनाग्रस्त मृतक का उसके धर्म का विचार किए बिना अनिवार्य रूप से दाह संस्कार किया जाना चाहिए। यह ध्यान रखना चाहिए कि हमारी लड़ाई कोरोना महामारी तक ही सीमित है। जो भी तत्व देश का साथ न देकर कोरोना का साथ दे रहे हैं, उनके विरुद्ध कठोरतम कारवाई हो, यही हमारी अपेक्षा है। हम सभी देशवासी इस महामारी से मुक्त कर विकास के पथ पर ले जाना चाहते हैं। बजरंग दल सह विश्व हिंदू परिषद ने मांगों से संबंधित एक पत्र प्रधानमंत्री व गिरी मंत्री को भी भेजा है।
डेहरी/ रोहतास
निजामुद्दीन मरकज की घटना अत्यन्त शर्मनाक और दुर्भाग्यजनक है। ऐसा लगता है कि कोरोना वायरस के विरुद्ध पिछले 18 दिनों के संघर्ष और लाकडाउन की उपलब्धियों पर यह घटना पानी फेर सकता है। इस्तेमा के नाम पर दुनिया के 25 देशों और भारत के तब्लीगी यहाँ हजारों की संख्या में कई दिनों से एकत्रित थे। अब इस्लाम के प्रचार के लिए इनमें से 15 सौ से अधिक भारत के कई राज्यों की मस्जिदों में छिपे बैठे हैं। इनमें से 400 से ज्यादा पकड़े जा चुके हैं। पकड़े गए कई मौलवी कोरोनाग्रस्त पाए गए हैं। केरल से कश्मीर तक इन मौलवियों द्वारा संक्रमण फैलाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। ऐसा लगता है कि अब निजामुद्दीन मरकज कोरोना नामक भूकंप का केन्द्र बन चुका है। उक्त बातें बजरंग दल के जिला संयोजक गोपी कुमार में प्रेस बयान जारी कर कही है।
उन्होंने कहा है, कि मरकज के पदाधिकारी अपने अक्षम्य अपराध को ढकने के लिए प्रशासन व पुलिस को उत्तरदायी ठहराने का दुस्साहस कर रहे हैं।
पिछले दिनों देश के तथाकथित सेकुलर बुद्धिजीवियों ने शाहीन बाग जैसे स्थानों पर जाकर उनका व देशव्यापी हिंसा का समर्थन किया था। उनकी इस घटनाक्रम पर चुप्पी आश्चर्यजनक है। उनसे हमारी अपील है कि वे अपने प्रभाव का उपयोग कर इस प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगाए। विश्व हिन्दू परिषद सह बजरंग दल केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों से अपील करती है, कि मरकज, मस्जिदों व मदरसों में छिपे इन तत्वों को बाहर निकालने की जगह उनकी इमारतों को ही क्वारेंटाइन करके वहीं उनका इलाज किया जाए, जिससे यह महामारी वहीं तक सीमित रहे।
जो विदेशी मुल्ला मौलवी टूरिस्ट वीजा लेकर यहाँ कट्टरपंथ के प्रसार के लिए आए हैं, उनका वीजा रद्द कर उन पर सख्त कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए।कोरोनाग्रस्त मृतक का उसके धर्म का विचार किए बिना अनिवार्य रूप से दाह संस्कार किया जाना चाहिए। यह ध्यान रखना चाहिए कि हमारी लड़ाई कोरोना महामारी तक ही सीमित है। जो भी तत्व देश का साथ न देकर कोरोना का साथ दे रहे हैं, उनके विरुद्ध कठोरतम कारवाई हो, यही हमारी अपेक्षा है। हम सभी देशवासी इस महामारी से मुक्त कर विकास के पथ पर ले जाना चाहते हैं। बजरंग दल सह विश्व हिंदू परिषद ने मांगों से संबंधित एक पत्र प्रधानमंत्री व गिरी मंत्री को भी भेजा है।