प्राइवेट हॉस्पिटलों मैं ओपीडी सेवा जल्द हो शुरू, लॉक डाउन का पालन करते हुए करें मरीजों का इलाज |

गौतम कुमार शर्मा
डेहरी/रोहतास
 शहर में लॉक डाउन होने के कारण अधिकतर प्राइवेट अस्पताल के बंद होने के कारण बीमार मरीजों की परेशानी बढ़ती जा रही है इसको देखते हुए सिविल सर्जन डॉक्टर जनार्दन शर्मा ने सभी निजी अस्पतालों के संचालकों एवं डॉक्टरों से पत्र लिखकर ओपीडी सेवा शुरू करने का अनुरोध किया है जिससे इलाज के लिए सड़क पर भटक रहे मरीजों को जीवन मिल सके उन्होंने बताया कि निजी अस्पतालों के ओपीडी में सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए अपने क्लिनिक में मरीजों का उचित इलाज करें लॉक डाउन के नियमों का विशेष रुप से ध्यान देते हुए मरीजों का उचित इलाज शुरू होने से भटक रहे मरीजों को नया जिंदगी मिलेगा किसी प्राइवेट अस्पताल में भीड़ नहीं लगने की बातें की उन्होंने कहा कि इसकी जवाबदेही अस्पताल के संचालक खुद तय करेंगे स्वास्थ्य विभाग द्वारा आदेश में यह कहा गया है कि आने वाले मरीजों में यदि किसी में कुरौना बीमारी के लक्षण दिखते हैं तो इसकी सूचना तत्काल सदर हॉस्पिटल को दे निजी चिकित्सक सेवा भावना से मरीजों का इलाज निर्भीक होकर करें ताकि किसी भी व्यक्ति को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े निजी चिकित्सकों से मांगा गया एंबुलेंस डिटेल्स स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पताल के संचालकों से एंबुलेंस के डिटेल्स भी मांगी है एंबुलेंस के नंबर चालक का नाम मोबाइल नंबर के साथ सूची उपलब्ध कराने का भी निर्देश उन्होंने सभी प्राइवेट हॉस्पिटल के संचालकों को दी है ताकि कोरोनावायरस के संक्रमण से मरीजों की संख्या बढ़ने पर निजी अस्पताल के एंबुलेंस का इस्तेमाल किया जा सके सिविल सर्जन ने अपने आदेश में कहा कि आपदा की इस घड़ी में निजी स्थान भी आम लोगों की सेवा में होनी चाहिए निजी चिकित्सक सहयोग करें तथा सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए मरीजों का इलाज मानवता को देखते हुए तत्काल शुरू करें जिससे विभिन्न रोगों से ग्रसित मरीजों का जीवन बच सकें अधिकतर निजी अस्पतालों के बंद होने के कारण * के इलाज में लगे सरकारी तंत्र और बंद किए गए निजी अस्पताल से करोना और आवाम बीमारी में लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है सदर अस्पताल में इमरजेंसी सेवा में मरीजों का इलाज हो रहा है लेकिन निजी अस्पतालों की संख्या अधिक होने के कारण ज्यादा संख्या में लोग प्राइवेट हॉस्पिटलों में इलाज कराते थे इन हॉस्पिटलों के बंद होने के कारण सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।