गौतम शर्मा
डेहरी डालमियानगर पूरे देश में लॉकडाउन की स्थिति में जहां भारतीय रेलवे ने यात्री ट्रेनों का परिचालन पूर्णत बंद किया है। वहीं देश के कोने -कोने में निर्बाध गति से खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल के हजारों रेलकर्मी अपनी जान जोखिम में डाल कर गुड्स ट्रेनों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
कोरोनावायरस के खिलाफ भारतवासियों के द्वारा छेड़ी गई इस जंग में अपने परिवार से दुर रहकर देश की चुनौतियों को समझते हुए अपनी सेवाएं दिन रात प्रदान कर रहे हैं ताकि देश में बिजली आपूर्ति हेतू कोयला,चावल, गेहूं, नमक, प्याज, फल, सब्जी, दुध जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति निर्बाध गति से जारी रहें। डेहरी, सोननगर, पहलेजा, करवंदिया, सासाराम सहित मंडल के संकेत एवं दूरसंचार विभाग के हजारों रेलकर्मी कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रति सतर्कता बरतते हुए लॉकडाउन के नियमों के तहत सोशल डिस्टेंसि मेंटेन करते हुए 24 घंटे फील्ड में डटे हुए हैं। और पैनल बोर्ड, फील्ड सिग्नल, प्वाइंट एवं ट्रेक सर्किट की नियमित जांच कर रहे हैं। कोचिंग ट्रेन हो या गुड्स ट्रेन, ये सिग्नल की वजह से ही सुरक्षित दौड़ पाती है। सामान्य दिनों में यह अक्सर देखा जाता है कि जरा सी खराबी आने पर ट्रेन यथावत स्थान पर खड़ी हो जाती है। जब तक सिग्नल विभाग का रेलकर्मी उसे नहीं सुधारता परिचालन शुरू नहीं हो पाता। अभी देश में लॉकडाउन चल रहा है। कोचिंग ट्रेन थम चुकी है। केवल गुड्स ट्रेनें ही चलाई जा रही है। ताकि देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। देश में खाद्य पदार्थ की आपूर्ति एवं बिजली की आपूर्ति निरंतर जारी है तो निश्चित तौर पर यह सिग्नल बेहतर होने का नतीजा है। अगर देश की इस मुश्किल की घंडी में सिग्नल विभाग के यह जाबांज रेलकर्मी कोरोना से डर गए और काम बंद कर दिया तो मालगाड़ीयों का परिचालन बंद हो जाएगा। जिससे देश में खाद्य पदार्थों की किल्लत हो जाएगी।
देश के लिए कोरोना एक चुनौती है और हम चुनौतियों से नहीं डरते।
संकेत एवं दूरसंचार विभाग के रेलकर्मियों का कहना है कि कोरोना देश के लिए एक चुनौती है और देश एक कठिन दौर से गुजर रहा है। ऐसी हालात में हमें कोरोना का डर नहीं। हम इसे चुनौती के रूप में लेते हैं और सतर्कता बरतते हुए देश की इस कठिन दौर में अपनी जान की परवाह किए बगैर देश के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। रेलवे में हम अकेले नहीं हैं जो काम कर रहे हैं। ट्रेन ड्राइवर, गार्ड, गैंगमेन, स्टेशन मास्टर, कंट्रोल तथा अधिकारी भी मार्गनिर्देशन के लिए डटे हुए हैं। हम रेलकर्मी इस कठिन दौर में अपनी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए आप सभी के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं कृपया आमजनों से अपील है कि आप हम सभी के लिए अपने अपने घर में बने रहें।
डेहरी डालमियानगर पूरे देश में लॉकडाउन की स्थिति में जहां भारतीय रेलवे ने यात्री ट्रेनों का परिचालन पूर्णत बंद किया है। वहीं देश के कोने -कोने में निर्बाध गति से खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल के हजारों रेलकर्मी अपनी जान जोखिम में डाल कर गुड्स ट्रेनों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
कोरोनावायरस के खिलाफ भारतवासियों के द्वारा छेड़ी गई इस जंग में अपने परिवार से दुर रहकर देश की चुनौतियों को समझते हुए अपनी सेवाएं दिन रात प्रदान कर रहे हैं ताकि देश में बिजली आपूर्ति हेतू कोयला,चावल, गेहूं, नमक, प्याज, फल, सब्जी, दुध जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति निर्बाध गति से जारी रहें। डेहरी, सोननगर, पहलेजा, करवंदिया, सासाराम सहित मंडल के संकेत एवं दूरसंचार विभाग के हजारों रेलकर्मी कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रति सतर्कता बरतते हुए लॉकडाउन के नियमों के तहत सोशल डिस्टेंसि मेंटेन करते हुए 24 घंटे फील्ड में डटे हुए हैं। और पैनल बोर्ड, फील्ड सिग्नल, प्वाइंट एवं ट्रेक सर्किट की नियमित जांच कर रहे हैं। कोचिंग ट्रेन हो या गुड्स ट्रेन, ये सिग्नल की वजह से ही सुरक्षित दौड़ पाती है। सामान्य दिनों में यह अक्सर देखा जाता है कि जरा सी खराबी आने पर ट्रेन यथावत स्थान पर खड़ी हो जाती है। जब तक सिग्नल विभाग का रेलकर्मी उसे नहीं सुधारता परिचालन शुरू नहीं हो पाता। अभी देश में लॉकडाउन चल रहा है। कोचिंग ट्रेन थम चुकी है। केवल गुड्स ट्रेनें ही चलाई जा रही है। ताकि देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। देश में खाद्य पदार्थ की आपूर्ति एवं बिजली की आपूर्ति निरंतर जारी है तो निश्चित तौर पर यह सिग्नल बेहतर होने का नतीजा है। अगर देश की इस मुश्किल की घंडी में सिग्नल विभाग के यह जाबांज रेलकर्मी कोरोना से डर गए और काम बंद कर दिया तो मालगाड़ीयों का परिचालन बंद हो जाएगा। जिससे देश में खाद्य पदार्थों की किल्लत हो जाएगी।
देश के लिए कोरोना एक चुनौती है और हम चुनौतियों से नहीं डरते।
संकेत एवं दूरसंचार विभाग के रेलकर्मियों का कहना है कि कोरोना देश के लिए एक चुनौती है और देश एक कठिन दौर से गुजर रहा है। ऐसी हालात में हमें कोरोना का डर नहीं। हम इसे चुनौती के रूप में लेते हैं और सतर्कता बरतते हुए देश की इस कठिन दौर में अपनी जान की परवाह किए बगैर देश के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। रेलवे में हम अकेले नहीं हैं जो काम कर रहे हैं। ट्रेन ड्राइवर, गार्ड, गैंगमेन, स्टेशन मास्टर, कंट्रोल तथा अधिकारी भी मार्गनिर्देशन के लिए डटे हुए हैं। हम रेलकर्मी इस कठिन दौर में अपनी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए आप सभी के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं कृपया आमजनों से अपील है कि आप हम सभी के लिए अपने अपने घर में बने रहें।
