नगर परिषद चुनाव मैंमहिला प्रत्याशी हाशिये पर नामांकन में पति,देवर और भाई पहन रहे है माला ,कौन है आप ?



रिपोर्ट:- गौतम शर्मा ,वारिस अली/मो तसलीम 
डेहरी/रोहतास
बिहार सरकार ने डेहरी डालमियानगर नगर परिषद क्षेत्र को अति पिछड़ा महिला घोषित कर दिया है जिसके वजह से पुराने प्रत्याशियों मैं उदासी छा गई है दूसरी तरफ नामांकन करने वाले महिलाओं के ऊपर उनके पति एवं रिश्तेदार खुद  माला पहन कर मीडिया के सामने आ रहे हैं और प्रत्याशियों के चेहरे पर खामोशी दिखाई दे रहा है ऐसा ही हम देख रहे हैं और जनता में चर्चा भी है
डिहरी नगरीय चुनावी  मैदान में वार्ड पार्षदों के अलावा मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद के लिए कईनए चेहरे उम्मीदवार है। वही यह भी देखा जा रहा है कि महिला प्रत्याशी के साथ उनके पति,देवर,भाई या फिर  पुत्र 
 माला पहन कर मीडिया के समक्ष अपना बयान देते हुए दिख रहा है इस तरह से नारी का दोहन हो रहा है। जो न्यायोचित नहीं है
 नारी की आज़ादी पर  प्रश्न चिन्ह लग रहा है,नारी की मुखर स्वतंत्रता पर कब्जा पति,देवर या 
भाई ही रखने जा रहे है। यह बड़ा सवाल है ?डिहरी के मतदाता ऐसी  महिला प्रत्याशियों पर अंगुली उठाते हुए चर्चा गर्म किए हैं
 नगर में थोड़ी सामाजिक पहचान 
बना चुके अपने पत्नी या अन्य को चुनावी मैदान में उतारकर अपनी पहचान बनाने में और जीत हासिल करने के लिए सब कुछ जुगाड़ कर रहे हैं महिला प्रत्याशी के पति,देवर या भाई को अपने पत्नी,भाभी,बहन या माँ पर हावी होते देख वोटर इनको अनदेखा 
करने को ठान चुके है।  जीत से पहले यह आलम है तो जीत के बाद आम जनता का और बुरा हाल हो जायेगा।  प्रत्याशी को बोलने से दूर करते नज़र आ रहे है ,महिला प्रत्याशी के पति और देवर यह जताना चाह रहे है कि मै ही सब कुछ हूँ। 
माला पहन कर ये पति और देवर महिला प्रत्याशी के मन में कुछ नया सोच है भी तो बोलने की आज़ादी नहीं है। क्या जीत के 
बाद वो सही से अपने स्वतंत्र भाव से कार्य कर सकेंगी। यह प्रश्न उठता है। डिहरी के मतदाताओं को लग रहा है कि अगर ऐसे को 
वोट देते है तो उनकी स्वयं की भूमिका क्या रहेगी ?फिर तो हनेशा पति,देवर या भाई के मन से कार्य करेगी।कुछ बेहतर करने की जिज्ञासा पति या संबंधी के आगे दबाव में दबी रह जाएगी  मुख्य पार्षद और उप मुख पार्षद के लिए कई नए चेहरे नामांकन किये है,उनका राजनितिक अनुभव क्या है ? घर की चाहरदीवारी से 
बाहर आकर नगर की समस्या को कैसे दूर कर पाएंगी ? जिसको नगर निकाय नियमावली का ए बी सी डी नहीं पता है। मुख्य पार्षद और 
उप मुख्य पार्षद पद को महिला अति पिछड़ा बनते ही,कई पुरुष प्रत्याशियों के पैर के नीचे से जमीन खिसक गई है.,ऐसे में ऐसे भावी पुरुष प्रत्याशी 
अपने पत्नी,कोई अपनी भाभी तो कोई अपनी बहन तो कोई भवह को उतार दिया है./नामांकन कराने के समय स्वयं ही माला पहने नगर के विकास 
की महिमा का बखान कर रहे है / जन कल्याण की आत्मा जो पांच साल से सोई हुई थी वो  उमड़ पड़ी है। 
 मतदाता की माने तो कई प्रत्याशी फालतू है। उनको कल्याण भाव नया-नया जागा है। किसी ने तो यह तक कह दिया कि चेयरमैन होते ही करोड़पति  
बन ही जाना है। पहले वार्ड पार्षदों को चेयरमैन या वाइस चेयरमैन के वोट के लिए अच्छी रकम मिलती थी ,अब वार्ड पार्षदी में क्या रखा है ? .नक्शा पास कराना है तो बीस से पचीस हज़ार रूपये देने होते है. कौन बोला ,कोई नहीं ?  नगरीय योजनाये कौन -कौन सी है,नगर के जनता को कौन-कौन लाभ मिलना चाहिए? जो नहीं मिला जनता को ,क्या महिला प्रत्याशिओं को मालूम है ? नहीं / पतिओ के भरोसे जीत की उम्मीद रखने वाले भावी मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद प्रत्याशी को डिहरी के मतदाता अपने हिसाब से क्या रिजल्ट देते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा