रिपोर्ट ;-गौतम शर्मा , वारिस अली
डेहरी /रोहतास
रोहतास जिला स्थित डेहरी डालमियानगर उद्योग पूँज बिहार राज्य के अंतर्गत अपने काल खंड में एशिया महादेश का एक बड़ी इकाई के रूप में जानी जाती थी। इस उद्योग पुंज कि एक बड़ी विशेषता थी कि इसकी सभी इकाई एक ही औद्योगिक क्षेत्र के अंदर स्थापित था। इसके अंदर जितनी भी इकाई स्थापित थी उसका कच्चा माल इस इकाई के अगल बगल ही मौजूद पाए जाते थे और उत्पादित वस्तुओं का लाने लेजाने के लिये रेलवे और सड़क मार्ग भी बिल्कुल समिप है। इस इकाई के अन्दर सरकारी और गैर सरकारी कर्मचारी लगभग 30-35 हजार कि संख्या में कार्यरत थे। इस उद्योग पूँज में इस राज्य के हि नही बल्कि दुसरे राज्य के भी कर्मचारी काम करते थे। कारखाना चालू कि स्थिति में इस जिले के ही नहीं आस-पास जिले के लोग खुशहाली कि जिन्दगी ब्यतित करते थे। इस कारखाने क शिलान्यास एवं उद्घाटन सुभाष चन्द्र बोस एवं राजेन्द्र प्रसाद जी के द्वारा किया गया था। वर्ष 1984 में कारखाना बंद हो जाने के कारण इस जिले को ही नहीं आस पास के जिले में बिरानगी छा गयी कार्यरत मजदूर बेकार हो गए। बेरोजगारी के कारण मरघट जैसा सन्नाटा का स्थिति बन चुका है कार्यरत मजदूर भयंकर त्रासदी के दौर से गुजरना पड़ा। यहाँ तक की मजदूरों को भोजन दवा और तन ढकने के लिए कपड़ा के लाले पड़ गए। बच्चों के पेट में कीड़े पनप गए दवा खरीदने के लिए पैसे नहीं थे कई मजदूरों को तो दवा और भोजन के वगैर दम तोड़ना पड़ा। मजदूरों की कितनी दर्द भरी कहानी बयां करूँ इस सबके बीच फैक्ट्री के नीलामी के समय भारत सरकार के रेल विभाग द्वारा, स्थापित इकाई परिसर को खरीद लिया गया। सरकार द्वारा यह कहा गया की डालमियानगर उद्योग पूँज में रेल से सम्बंधित पार्ट पुर्जे एवं रेल वैगन का निर्माण किया जायेगा। यह जान कर लोगों के अंदर एक नई आशा की किरण जगी सरकार द्वारा राइटस कंपनी को इस इकाई को अधिकारी के साथ एकरारनामा भी किया गया। राइटस कंपनी द्वारा कहा गया की पहले कबाड़ हटाने के बाद कारखाना चालू किया जायेगा। सारे पुराने मशीनों को काट कर कबाड़ के रूप में हटाने का कार्य भी पूरा कर लिया गया। संसद भवन में भी कारखाना चालू करने की घोषणा की गई थी। परन्तु अभी तक कारखाना चालू करने हेतु सुगबुगाहट भी नहीं जान पड़ती है। आपका हृदय संत विचार धारा से ओत-प्रोत है। संत का पवित्र कार्य राष्ट्र की समाज की या व्यक्तिगत समस्या हो, निरन्तर हल करते रहते है, ऐसा सदग्रन्थ का उद्घोष है। आप इस निरंतर कार्य कर समस्या का समाधान कर रहे है। आप स्वयं इस उद्योग पूँज का अवलोकन करेंगे तो आश्चर्य चकित हो जायेंगे और मजदूरों की गुरवती दास्ताँ सुनेंगे तो भावविह्वल हो जायेंगे।
जनसंघ काल से भ० ज० पा० हमसफर साधारण कार्यकर्ता आमंत्रित करता है कि आप स्वयं आकर इस कारखाना का अवलोकन कर शिलान्यास करने की कृपा करें। एवं उद्घाटन भी करें। क्योंकि आपका यह कथन की जिसका मैं शिलान्यास करता हूँ उसका उद्घाटन भी करता हूँ। यानी वह कार्य समय अवधि के अंदर पूरा होता है. आपके द्वारा यह पुनीत कार्य हेतु अवसर अगर प्राप्त होता है तो बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा ही एवं बिहार में एक नया सूर्योदय होगा। कारखाना चालू हो जाने से सबका साथ भी मिलेगा सबका विकास भी होगा और सबका विश्वास भी बढ़ेगा। उपरोक्त आग्रह पत्र हमारे वरिष्ठ संवाददाता वारिस अली को श्री बसंत प्रसाद दरिहत निवासी ने देते हुए अपनी बात को प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाने का अनुरोध किया है यह कार जनहित में बेहद आवश्यक है और रोजगार के दिशा में ऐतिहासिक कदम भी कहा जाएगा
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