रिश्तो के निर्माण में जनसंपर्क की भूमिका विषय पर गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय में सेमिनार





रिपोर्ट ;- वारिस अली ,गौतम शर्मा 

डेहरी /रोहतास 

 

 गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के तत्वावधान में एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया।

"रिश्तों के निर्माण में जनसम्पर्क की भूमिका: मुद्दें और तरीके" विषय पर पब्लिक रिलेशन सोसायटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अजीत पाठक  ने अपने वक्तव्य दिए। आमंत्रित वक्ता ने जनसंपर्क की विभिन्न कलाओं को विस्तार से बताते हुए कहा कि जनसम्पर्क सतत क्रियाशील अभ्यास है जिसकी उपयोगिता सांस्थानिक प्रमाणिकता के साथ साथ व्यापारिक रिश्तों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण रूप से विद्यमान है। जनसंपर्क को सामाजिक विज्ञान की अतिमहत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए उन्होंने कहा कि संस्थागत जनसंपर्क समय की जरूरत है और यह लंबे समय तक आपके व्यापारिक या सामाजिक छवि निर्माण में सहयोगी अभ्यास के रूप में जाना जाता है। आमंत्रित वक्ता डॉ अजीत पाठक ने जनसम्पर्क की विभिन्न विधाओं को विद्यार्थियों के समक्ष रखा और बताया कि विभिन्न तरीकों से इसे संचालित करने के क्या-क्या प्रभावी कार्यक्रम हो सकते हैं। भारतीय परिप्रेक्ष्य में उन्होंने विभिन्न कम्पनियों के उदाहरण देकर विद्यार्थियों को सरलीकृत तरीके से जनसंपर्क की उपयोगिता को रेखांकित करने का प्रयास उन्होंने अपने सम्बोधन के माध्यम से किया।वेबिनार की आधिकारिक शुरुआत करते हुए कला संकाय के डीन प्रो डॉ सुरेश चंद्र नायक ने विषय प्रवेश कराया और जनसम्पर्क के बाबत तथ्यात्मक प्रमाणों के साथ महत्वपूर्ण बातों को रखा। उन्होंने छात्रों को जनसपंर्क की उपयोगिता और इसके व्यवसायिक इस्तेमाल पर विस्तार से प्रकाश डाला।कार्यक्रम का संचालन विभाग के परास्नातक के छात्र सुमेश्वर सोनू ने किया।वेबिनार में मुख्य वक्ता के समक्ष छात्रों ने अपने सवाल भी रखें जिसका उन्होंने विस्तारित उत्तर दिया।

कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ अमित कुमार मिश्र ने आगत वक्ता का धन्यवाद ज्ञापन किया और कहा कि जनसंपर्क एक ऐसी विधा है  जिसका उपयोग रोजगार उन्मुख कार्यो के लिए किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने पीआरएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष से बिहार चैप्टर के शुरुआत की मांग भी रखी। जिसको लेकर मुख्य वक्ता ने सकारात्मक जवाब दिया। कार्यक्रम के सफल संचालन में विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ अमित कुमार सिंह, स्नेहाशीष वर्धन, चंचल सिंह, स्मृति,फहमीना हुसैन व जमाल खान  ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।वेबिनार में विभाग के शोधार्थी, यूजी एवं पीजी के सभी छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से भागीदारी दिखाई।