APNA BHARAT सुंदरकाण्‍ड और रामायण का पाठ कर हनुमान जन्‍मोत्‍सव मनाया गया

रिपोर्ट :-गौतम कुमार
डेहरी/रोहतास
शनिवार को डेहरी समेत जिले भर में बड़े ही धूमधाम से हनुमान जन्‍मोत्‍सव मनाया जा रहा है। सुबह से ही मंदिरों में भक्‍तों की भीड़ जमा हो गई है। लोग अपनी अपनी श्रृद्धा से पवनपुत्र हनुमान का पूजन अर्चन कर रहे हैं। कहीं पदयात्रा निकाली जा रही है तो कहीं सुंदरकाण्‍ड और रामायण का पाठ किया जा रहा है। डेहरी में हनुमान मानस मंदिर में सुवह 6 बजे से हनुमान चालीसा पाठ किया जा रहा है। बजरंग दल द्वारा हनुमान जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर नगर संयोजक दीपक दास के नेतृत्व मे डेहरी बाजार हनुमान मानस मंदिर मे पूजा अर्चना कर 11 बार हनुमान चालीसा पाठ के बाद "श्रीराम जय राम जय जय राम" विजय माहा मंत्र सभी कार्यकर्ताओं के साथ किया गया। कार्यकर्ताओ ने जय कारा वीर बजरंगी हर हर महादेव, जय श्री राम, जय हनुमान का जयकारा लगाया। 51 किलो बुंदी का भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया गया। नगर संयोजक दीपक दास ने बताया कि श्री राम के प्रिय भक्त हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता के रूप में जाना जाता है। हनुमानजी की सच्चे मन से उपासना करने पर वे अपने भक्तों को आठ प्रकार की सिद्धियां तथा नौ प्रकार की निधियां प्रदान कर सकते हैं। चैत्र मास की पूर्णिमा को श्री राम भक्त हनुमानजी का जन्मोत्सव बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार, शनिवार व मंगलवार का दिन हनुमान जी की उपासना के लिए और भी श्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार बजरंगबली भगवान शिव के ग्यारहवें अवतार हैं, जिनका जन्म धरती पर भगवान श्री राम की सहायता करने के लिए हुआ था। आइए जानते हैं पवनपुत्र के पास कौन सी चमत्कारिक अष्ट सिद्धियां हैं और उनका क्या महत्व है। धर्म प्रसार जिला प्रमुख भोला चौहान ने बताया कि अणिमा इस सिद्धि के बल पर हनुमान जी कभी भी अति सूक्ष्म रूप धारण कर सकते हैं। इस सिद्धि का प्रयोग हनुमान जी ने तब किया था जब वे समुद्र पार कर लंका पहुंचे थे। इस सिद्धि का उपयोग करके ही हनुमान जी ने पूरी लंका का निरीक्षण किया था। अति सूक्ष्म होने के कारण हनुमानजी के विषय में लंका के लोगों को पता तक नहीं चला। संघ जिला कार्यवाह ऋषि राज ने बताया कि महिमा इस सिद्धि के बल पर हनुमान जी ने कई बार विशाल रूप धारण किया है। जब हनुमान जी समुद्र पार करके लंका जा रहे थे तब बीच रास्ते में नागों की माता सुरसा ने उनका रास्ता रोक लिया था। उस समय सुरसा को परास्त करने के लिए हनुमान जी स्वयं का रूप सौ योजन तक बड़ा कर लिया था। इसके अलावा माता सीता को श्री राम की वानर सेना पर विश्वास दिलाने के लिए महिमा सिद्धि का प्रयोग करते हुए स्वयं का रूप अत्यंत विशाल कर लिया था। बजरंग दल नगर सह संयोजक चंदन गुप्ता ने बताया कि इस सिद्धि के बल पर हनुमानजी किसी भी वस्तु को तुरंत ही प्राप्त कर लेते हैं। पशु पक्षियों की भाषा को समझ लेते हैं आने वाले समय को देख सकते हैं। रामायण में इस सिद्धि के उपयोग से हनुमान जी ने सीता माता की खोज करते समय कई पशु पक्षियों से बातचीत की थी, जिससे वह यह जान सकें कि माता सीता इस समय में कहां पर हैं और हनुमान जी बहुत महान ज्योतिष के जानकार भी हैं, इसकी शिक्षा इनके गुरु भगवान सूर्य देव ने इन्हें प्रदान की थी। इन सबके कारण हनुमान जी ने माता सीता को अशोक वाटिका में खोज लिया था। हनुमान जन्मोत्सव का प्रसाद को वितरण में सभी कार्यकर्ताओं ने शांति पूर्वक कार्य किये। जिसमे ऋतु राज, गौरक्षा प्रमुख रणधीर कुमार, अखाड़ा प्रमुख नीरज कुमार, अकाश दीप, प्रकाश कुमार, सन्नी कुमार, अमन कुमार, मुकेश कुमार, बन्टू कुमार इत्यादि सदस्य सामिल रहे।