रोहतास में कुख्यात नक्सली कमांडर विजय आर्य गिरफ्तार, 10 राज्यों की पुलिस कर रही थी तलाश


 रिपोर्ट ;- गौतम कुमार ,वारिश अली 

डेहरी /रोहतास 

रोहतास थाना क्षेत्र के कैमूर पहाड़ी के नौहट्टा जंगल से कुख्यात नक्सली नेता विजय आर्या को स्पेशल टीम ने अरेस्ट कर लिया है। बुधवार रात इसकी जानकारी देते हुए एसपी आशीष भारती ने बताया कि जिस कुख्यात नक्सली को दस राज्यों की पुलिस लंबे अरसे से तलाश कर रही थी उस विजय आर्य को पटना से आई आईबी की टीम ने रोहतास के पहाड़ी क्षेत्र से बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ उसके सहयोगी सुदामा पासवान व एक महिला नक्सली की भी गिरफ्तारी हुई है। कई पुलिसकर्मियों की हत्या, बम विस्फोट व अन्य घटनाओं में विजय आर्य की प्रमुख भूमिका होने का आरोप है।

नक्सली कमांडर की गिरफ्तारी से नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है। विजय आर्य की गिरफ्तारी के लिए झारखंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों की पुलिस भी खाक छान रही थी।

बुधवार रात प्रेस वार्ता में एसपी आशीष कुमार भारती ने बताया कि विजय आर्य मूल रूप से गया जिले के करमा गांव का निवासी है जो तीस वर्षों से नक्सली संगठन में शामिल था। हाल के दिनों में रोहतास में नक्सली गतिविधि सुस्त पड़ने के कारण सेंट्रल कमेटी ने विजय आर्य को रोहतास और कैमूर में माओवादी संगठन के विस्तार की जिम्मेवारी सौंपी थी। चार दिनों से वह रोहतास-कैमूर के पहाड़ी क्षेत्रों में संगठन के विस्तार में जुटा था। सूत्रों कि मने तो विजय आर्य पर देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस ने कुल 14 केस दर्ज किए हैं। इनमें तीन तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और एक पंजाब के खरार अनुमंडल में है। कोंच प्रखंड के करमा गांव के रहनेवाले विजय आर्य को 30 अप्रैल 2011 को कटिहार जिले के बारसोई इलाके से पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन एक के बाद एक कानूनी लड़ाई जीतने के बाद वह 13 सितंबर 2018 को रिहा हो गया। जेल से निकलते ही वह फिर सक्रिय हो गया था, इसलिए आई आईबी की टीम ने विशेष सूचना पर उसकी गिरफ्तारी की है।

अंतरराष्ट्रीय माओवादी संगठन से रहा है संबंध माओवादियों के शीर्ष बुद्धिजीवियों में से एक और अंतरराष्ट्रीय माओवादी संगठन रीम और कम्पोसा के संस्थापकों में शामिल विजय कुमार आर्य को जेल में बंद रखने के लिए बिहार सरकार ने खूब कवायद की थी, लेकिन सबूत के अभाव में कोर्ट ने विजय आर्य को रिहा कर दिया था। इस पर 30 लाख का इनामी था पहली गिरफ्तारी के वक्त बिहार सरकार ने विजय आर्य को लेकर इतनी सजग थी कि उसने उन्हें भागलपुर सेंट्रल जेल के तृतीय खंड में हाई सिक्योरिटी में रखा गया था। सरकार की नजर में विजय आर्य इतने बड़े नक्सली नेता था कि उनकी गिरफ्तारी के लिए 30 लाख रुपए इनाम की घोषणा की थी। नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का टॉप लीडर माने जाने वाले विजय आर्य की गिरफ्तारी को बिहार पुलिस बड़ी उपलब्धि मान रही है। नक्सली कमांडर की गिरफ्तारी से नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है।