*चोरी के साथ ही समाप्त हुआ प्राचीन धूप घड़ी का अस्तित्व।*
*सूचना मिलने के बाद संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी में जुटी पुलिस*
रिपोर्ट:-गौतम कुमार
*डेहरी/रोहतास
शहर के एनीकट रोड में सिंचाई विभाग यांत्रिक कर्मशाला कार्यालय के सामने डेढ़ सौ वर्ष पुरानी धूप घड़ी को मंगलवार की रात अज्ञात चोरों ने चोरी कर ली है। बुधवार की सुबह जब लोग टहलने के लिए सड़कों पर निकले तो चोरी हुए धूप घड़ी के फाउंडेशन को देखकर अवाक रह गए। और पल भर में धूप घड़ी की चोरी की खबर आग की तरह शहर में फैल गई। सूचना पाकर पहुंची नगर थाना की पुलिस चोरों के संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी में जुट गई। यह मामला इस वजह से भी हाई प्रोफाइल बन गया है, क्योंकि धूप घड़ी के समीप डीआईजी, एसपी समेत अन्य अधिकारियों के कार्यालय व आवास हैं। तथा यह बिहार का सबसे प्राचीन धूप घड़ी है। बताते चलें कि धूप घड़ी उपयोग उस रास्ते से आने-जाने वाले लोग समय देखने के लिए करते थे। जिस तरह कोणार्क मंदिर के पहिए सूर्य की रोशनी से सही समय बताते है ठीक उसी प्रकार यह धूप घड़ी भी काम करती है। डेहरी के सिंचाई यांत्रिक प्रमंडल स्थित यह प्राचीन धूप घड़ी को ब्रिटिश शासन काल में बनाई गयी थी। इस प्राचीन धुप घड़ी के महत्त्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, कि लोग ब्रिटेन से तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए यहाँ आते थे। वर्ष 1871 में स्थापित राज्य की यह ऐसी घड़ी है, जिससे सूर्य के प्रकाश से समय का पता चलता है। तब अंग्रेजों ने सिंचाई विभाग में कार्यरत कामगारों को समय का ज्ञात कराने के लिए इस घड़ी का निर्माण कराया था, और एक चबूतरे पर इसे स्थापित किया गया था। इसी वजह से इसका नाम धूप घड़ी रखा गया। इस घड़ी में रोमन व हिन्दी के अंक अंकित है। उस समय नहाने से लेकर पूरा कामकाज समय के आधार पर होता था। वर्ष 1871 में घड़ी इतनी आम नहीं थी, जितनी आज के समय में हो चुकी है|यांत्रिक कार्यशाला में काम करने वाले श्रमिकों को समय का ज्ञान कराने के लिए यह घड़ी लगाया गया था। घड़ी के बीच में धातु की त्रिकोणी प्लेट लगी है और कोण के माध्यम से उसपर नंबर अंकित है। शोध अन्वेषक के अनुसार यह ऐसा यंत्र है, जिससे दिन में समय की गणना की जाती है। इसे नोमोन कहा जाता है। यंत्र इस सिद्धांत पर काम करता है कि दिन में जैसे-जैसे सूर्य पूर्व से पश्चिम की तरफ जाता है। उसी तरह किसी वस्तु की छाया पश्चिम से पूर्व की तरफ चलती है। सूर्य लाइनों वाली सतह पर छाया डालता है, जिससे दिन के समय घंटों का पता चलता है। समय की विश्वसनीयता के लिए धूप घड़ी को पृथ्वी की परिक्रमा की धुरी की सीध में रखना होता है। धुप घड़ी को संरक्षित एवं सौंदर्यीकरण को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने जनप्रतिनिधियों वासर प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई थी। किंतु किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। लोगों का मानना था, कि प्राचीन धूप घड़ी का अगर सौंदर्यीकरण कर सही तरीके से देख रेख की जाती तो ये हमारे शहर, राज्य के लिए पर्यटन क्षेत्र में शानदार कार्य हो सकता था। विदेशी पर्यटक जब भी रोहतास में आते थे तो वह गूगल के सहारे इस प्राचीन धूप घड़ी को भी देखने आते थे। जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की उपेक्षा का शिकार प्राचीन धूप घड़ी मंगलवार की रात चोरी होने के साथ ही धूप घड़ी अस्तित्व समाप्ति के कगार पर है, और आनेवाली पीढ़ी धूप घड़ी से वंचित हो जाएगी। इधर धूप घड़ी चोरी की सूचना के बाद डेहरी-डालमियानगर के हजारों लोग सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से इस घटना की निंदा करते हुए प्रशासन से तत्काल चोरी हुए धूप घड़ी की बरामदगी व चोरों पर कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। एसपी आशीष कुमार भारती का कहना है कि प्राचीन धूप घड़ी चोरी की बरामदगी को लेकर टीम गठित कर लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।