गाजर घास उन्मूलन सप्ताह के अंतर्गत नारायण कृषि विज्ञान संस्थान गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित


 गौतम कुमा
र की रिपोर्ट ;-

डेहरी /रोहतास 

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा आयोजित गाजर घास उन्मूलन सप्ताह के अंतर्गत नारायण कृषि विज्ञान संस्थान ,जमुहार के तत्वावधान में गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय परिसर एवं आसपास के गांवों के खेतों से गाजर घास हटाने का कार्यक्रम आज संपन्न हुआ ।संपूर्ण भारत वर्ष में कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि संस्थानों एवं कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को गाजर घास से होने वाली समस्याओं के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से 16 से 22 अगस्त तक गाजर घास उन्मूलन सप्ताह मनाया जा रहा है। गाजर घास उन्मूलन कार्य में मुख्य रूप से नारायण कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉक्टर एसपी सिंह एवं संदीप मौर्या के संयोजन में संस्थान के डीन डॉक्टर यू पी सिंह, शिक्षक डॉ रवि सक्सेना, डॉ मोहम्मद हाशिम के अलावे अन्य शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मचारियों तथा संस्थान के मालियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जबकि संस्थान के कृषि स्नातक एवं कृषि  स्नातकोत्तर के लगभग 500 छात्र-छात्राओं ने गाजर घास को समस्त रूप से नष्ट करने का कार्य किया ।इस कार्यक्रम में आसपास के गांव के किसान एवं समाजसेवी संस्थाओं को खेतों व सड़क के किनारे से गाजर घास को समूल रूप से नष्ट करने की प्रेरणा दी गई ।संस्थान के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों एवं समाजसेवी संस्थाओं को बताया कि मनुष्य में स्वांस का रोग, एलर्जी का रोग, खुजली का रोग, अनेकों प्रकार के ज्वरों का रोग, पशुओं के अंदर होने वाले रोगों को बढ़ावा देने का काम, मनुष्य के खून में अशुद्धि पैदा करके विभिन्न लोग फैलाना, पौधे के बीजों की गुणवत्ता को प्रभावित करना तथा खेत की उर्वरा शक्ति को नष्ट करना गाजर घास का मुख्य कार्य है ।गाजर घास से बहुत ही नुकसान होता है इसलिए इस को नष्ट करने का भरसक प्रयास करना चाहिए। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को यह भी जानकारी दी कि गाजर घास को उखाड़ कर उसे कंपोस्ट करके नेडप विधि से उच्च श्रेणी की खाद बनाई जा सकती है। इस खाद के निर्माण में प्रयोग की जानकारी किसानों को दी। नारायण कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा गाजर घास उन्मूलन कार्यक्रम को बेहतर ढंग से कार्यान्वित करने के पर कुलपति डॉक्टर एम एल वर्मा ने  इसे सराहनीय कदम बताया है।