वट सावित्री पूजा की पूजन सामग्री लेकर जुटी महिलाएं


कुमारी वर्षा की रिपोर्ट ;- 

डेहरी।रोहतास

पतियों के लिए महिलाओं द्वारा मनाया जाएगा। इस व्रत को लेकर शहर से गांव तक के बाजारों में पूजन सामग्री सज गए हैं।गुरुवार को झारखण्डी मंदिर मे सुबह से हीं वट सावित्री की पूजा के लिए बरगद पेड़ के समीप सुहागिन महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पूजन सामग्री के तौर पर सिंदूर,दर्पण,मौली,काजल,मेहंदी चूड़ी,माथे की बिंदी,साड़ी और सात तरह का अनाज और सत्यवान सावित्री की प्रतिमा को शामिल करते हैं। यह सभी चीजें वृक्ष के नीचे रखे जाते हैं। इसके बाद पेड़ की जड़ में जल अर्पित किया जाता है। जेष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाता है। महिलाएं अपने पति की लंबी आयु व सुख समृद्धि की कामना वट सावित्री की पूजा व आराधना करती हैं।सुहागिन महिलाएं बरगद पेड़ की पूजा कर पति की लंबी आयु की कामना की। बरगद पेड़ के नीचे ब्राह्मण द्वारा महिलाओं को सावित्री के तप के कारण यमराज से उनके पति की प्राणरक्षा की कथा सुनाया गया। कथा सुनने के बाद महिलाओं ने ब्राह्मण को दान देकर आशीर्वाद ग्रहण किया। श्रद्धालु महिलाओं द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल नहीं रखा गया। लोग बिना मस्क के ही पूजा करते देखे गए। यहां बता दें कि हिंदू शास्त्रों के अनुसार, वटवृक्ष के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु तथा अग्रभाग में शिव का वास माना गया है। वट वृक्ष यानी बरगद का पेड़ को देव वृक्ष माना जाता है। देवी सावित्री भी इस वृक्ष में निवास करती हैं।मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ महीने की अमावस्या के दिन वटवृक्ष के नीचे सावित्री ने अपने पति को पुन: जीवित किया था। तब से ये व्रत ‘वट सावित्री’ के नाम से जाना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए वटवृक्ष की पूजा करती हैं। वृक्ष की परिक्रमा करते समय इस पर 7 बार कच्चा सूत लपेटा जाता है। महिलाएं सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं। सावित्री की कथा सुनने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और पति के संकट दूर होते हैं। आचार्य ओम प्रकाश पांडे ने बताया कि 10 जून गुरुवार को वट सावित्री मनाया जाएगा। किंतु जेष्ठ अमावस्या तिथि का प्रारंभ 9 जून को दोपहर 1:28 मिनट से हो रहा है जिस का समापन 10 जून को 3:24 पर होगा। व्रत का पारण 11 जून शुक्रवार को होगा। इस दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लगेगा। आचार्य ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री ने अपने पति के प्राण यमराज से मुक्त करा कर ले आई थी इसी वजह से इस बात का विशेष महत्व है। यह माना जाता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास है। जिस कारण सुहागिनों को विशेष फल की प्राप्ति होती है। वट सावित्री व्रत की कथा सुनने से महिलाओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। तथा इस पद से सुहागिन महिलाओ को अखंड सौभाग्य व संतान की प्राप्ति होती है।