गौतम कुमार की रिपोर्ट ;-
डेहरी /रोहतास
जीवन के बदलते परिवेश में सुखमय जीवन की कल्पना तभी की जा सकती है जब आपके आस पास का वातावरण स्वच्छ और सुंदर हो। इसके लिए पहली शर्त है कि हमारा पर्यावरण संरक्षित रहे ताकि स्वस्थ जीवन हो और हम निरोग रहें।उक्त बातें पर्यावरण दिवस पर गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित एक वेबिनार में विश्वविद्यालय के सचिव गोविन्द नारायण सिंह ने कही। श्री सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हमारी संस्कृतिक और नैतिक जिम्मेदारी है। विश्वविद्यालय इसमें पहल कर रहा है। प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में अध्यक्षता करते हुए प्रबंधन विभाग के डीन प्रो आलोक कुमार ने कहा कि पर्यावरण का गिरता स्तर आज चिंता का विषय है, जिसे नियंत्रित करना आवश्यक है। मृदा अपरदन को रोककर और नए पौधों को लगाकर गिरते पर्यावरण को रोक जा सकता है। वहीँ कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पत्रकारिता एवं जनसंचार के विभागाध्यक्ष डॉ अमित मिश्रा ने पर्यावरण के कारण हुए विपरीत प्रभाव पर चिंता जाहिर किया और कहा कि कोरोना जैसे महामारी का मुख्य कारण पर्यावरण का बिगड़ना है। हम सभी को पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना चाहिए क्योंकि यह कहीं न कहीं हमारे संस्कृति और संस्कार दोनों से जुड़ा है।प्रकृति के साथ रहकर पर्यावरण संक्षरित किया जा सकता है। इसके लिए संकल्पित होकर वृक्षारोपण करें। कार्यक्रम को आई टी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अभिषेक श्रीवास्तव ने भी सम्बोधित किया और बताया कि वृक्षारोपण तो करना ही चाहिए साथ ही हमें अपनी आदतों को भी बदलने की आवश्यकता है। पर्यावरण का संरक्षण हमारे जीवन का हिस्सा होना चाहिए। कार्यक्रम में सभी प्राध्यापकों डॉ प्रमोद तिवारी, डॉ मुकेश कुमार,डॉ किशन राव, डॉ संदीप केश्वरवानी, निखिल निशांत,कुमुद रंजन, पूजा कौशिक, फेमिना हुसैन, राजीव रंजन, सुमित कुमार, सतीश कुमार, हिमांशु शेखर, राहुल पाडेय, गोविन्द कुमार, पंकज कुमार ने हिस्सा लिया और संरक्षण के उपायों पर चर्चा की ।
