पुष्पा गुप्ता की रिपोर्ट ;-
डेहरी/रोहतास
आज इंडियन डेंटल एसोसिएशन रोहतास सचिव डॉ नवीन नटराज एवं प्रवक्ता सह संपादक डॉ ओपी आनन्द तथा खजांची डॉ रवि रंजन ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी किया, जिसमे प्रवक्ता डॉ ओपी आनंद ने कहा कि, कोरोना के इस कठिन समय मे जब आये दिन लोगो की जान जा रही है और स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों की भारी कमी है, इस मुश्किल घड़ी में भी सरकार दन्त चिकित्सकों को नजरअंदाज कर मज़ाक बना रही है। ये पूरे देश का स्वास्थ्य विभाग जनता है कि MBBS और BDS की तीन साल की पाठ्यक्रम लगभग बराबर है और दन्त चिकित्सकों को पढ़ाई के दौरान भी हॉस्पिटल में भी जेनरल मरीजों को देखने के लिए पोस्टिंग दी जाती है। फिर भी ये सरकार की कौन सी मानसिकता है कि हिंदी पाठ्यक्रम से पढ़ें हुए आयुष चिकित्सकों को तो सेवा का मौका दे ही रही है और हद तो ये है कि अब घोषणा की गई है कि MBBS और नर्सिंग के छात्रों को भी कोरोना वारियर्स के रूप में रखा जाएगा। ये हम दन्त चिकित्सकों से मज़ाक नही तो क्या है? क्या हमें इतना बेकार समझती है ये सरकार।
अगर सरकार ऐसा समझाती है तो दन्त चिकित्सा महाविद्यालय को तत्काल बन्द कर देना चहिए, ताकि बेरोजगार दन्त चिकित्सकों की संख्या आये दिन न बढ़े। प्रवक्ता ने ये भी कहा कि मैं लगभग हर दिन मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को हर रोज ट्वीट करता हूँ, पर ये लोग आज तक जवाब देना उचित नही समझे। हमे इसी तरह से अगर नज़रअंदाज़ किया गया तो इस बेरोजगारी और भुखमरी में हम सभी केवल नाम के ही डॉक्टर कहलायेंगे, इस स्थिति में हमारी ज़िंदगी भी दांव पर लग सकती है। सरकार को इस बात का जवाब जरूर देना चाहिए कि हमे नज़रअंदाज़ क्यों किया जा रहा है?
