अम्बेडकर समान राजनीति व्यवस्था के हिमायती थे। वीरेन्द्र पासवान


 गौतम कुमार की रिपोर्ट ;-

डेहरी, /रोहतास 

आधुनिक भारत के  निर्माताओं में से एक माने जाने अम्बेडकर एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था के हिमायती थे, जिसमें सभी को समान राजनीतिक अवसर मिलें।जिसमें  धर्म, जाति, रंग तथा लिंग आदि के आधार पर भेदभाव न किया जाए। उनका यह राजनीतिक दर्शन व्यक्ति और समाज के परस्पर संबंधों पर बल देता है।उक्त बातें डॉ अम्बेडकर की 130वीं जयंती पर ईस्ट सेन्ट्रल रेलवे कर्मचारी युनियन डेहरी शाखा द्वारा आयोजित संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए ईसीआरकेयू के उपाध्यक्ष, लेखक व समाजसेवी  बीरेन्द्र पासवान ने कहीं। 

उन्होंने कहा कि अम्बेडकर को  दृढ़ विश्वास था कि जब तक आर्थिक और सामाजिक विषमता समाप्त नहीं होगी, तब तक जनतंत्र की स्थापना अपने वास्तविक स्वरूप को ग्रहण नहीं कर सकेगी।वे व्यक्ति की श्रेष्ठता पर बल देते हुए सत्ता के परिवर्तन को साधन मानते थे । वे कहते थे कि कुछ संवैधानिक अधिकार देने मात्र से जनतंत्र की नींव पक्की नहीं होती। उनकी जनतांत्रिक व्यवस्था की कल्पना में ‘नैतिकता’ और ‘सामाजिकता’ का समावेश है । दरअसल आज राजनीति में खींचा-तानी इतनी बढ़ गई है कि राजनैतिक नैतिकता के मूल्य गायब से हो गए हैं। हर राजनीतिक दल वोट बैंक को अपनी तरफ करने के लिए राजनीतिक नैतिकता एवं सामाजिकता की दुहाई देते हैं, लेकिन सत्ता प्राप्ति के पश्चात इन सिद्धांतों को अमल में नहीं लाते हैं।वहीं ईसीआरकेयू के केन्द्रीय सहायक महामंत्री रमेश चंद्रा ने" वर्तमान समय में अम्बेडकर के विचारों का महत्व "विषय पर अपनी विचार रखते हुए कहा कि अम्बेडकर समानता को लेकर काफी प्रतिबद्ध थे। उनका मानना था कि समानता का अधिकार धर्म और जाति से ऊपर होना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना किसी भी समाज की प्रथम और अंतिम नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। 

ईसीआरकेयू के सचिव एस पी सिंह एव एससी-एसटी एसोसिएशन के नेता व सीनियर सेक्शन इंजीनियर सरोज कुमार ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर के शिक्षा संबंधित विचार आज शिक्षा प्रणाली के आदर्श रूप माने जाते हैं। उन्हीं के विचारों का प्रभाव है कि आज संविधान में शिक्षा के प्रसार में जातिगत, भौगोलिक व आर्थिक असमानताएँ बाधक न बन सके, इसके लिए मूलअधिकार के अनुच्छेद 21-A के तहत शिक्षा के अधिकार का प्रावधान किया गया है।ओबीसी एसोसिएशन के अध्यक्ष एस एम सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा पहले  मजदूरों से प्रतिदिन 12-14 घंटों तक काम लिया जाता था। इनके प्रयासों से प्रतिदिन आठ घंटे काम करने का नियम पारित हुआ। मजदूरों के लिए ट्रेड यूनियन अधिनियम, औद्योगिक विवाद अधिनियम तथा मुआवजाआदि में इनके अतुलनीय योगदान रहे हैं। 


इस अवसर पर ईसीआरकेयू के युवा कार्यकारी उपाध्यक्ष देव कुमार राम, आई एन सिंह, सहायक सचिव संजय मंडल , विश्वनाथ कुमार, अजीत जेम्स उदय प्रकाश  ,प्रमोद यादव,अमरेश यादव, रवि गुप्ता,मुश्ताक अंसारी,शशिभूषण, रवि रंजन सिंह, सहित कई रेलकर्मी उपस्थित थे।