गौतम कुमार की रिपोर्ट ;-
मरीज बंध्याकरण ऑपरेशन के बाद महिला को खाट के सहारे भेजा गया घर
शर्मनाक तस्वीर देख हैरत में है स्वास्थ्य विभाग के वरीय पदाधिकारी
एंबुलेंस व्यवस्था की खुली पोल तो आमने सामने हुए चिकित्सा प्रभारी व एंबुलेंस चालक राज्य में विकास के लाख दावों के बीच रोहतास में बंध्याकरण ऑपरेशन के बाद महिला मरीज को खाट व डोली के सहारे 7 किलोमीटर की दूरी तय कर परिजनों द्वारा घर पहुंचाने की शर्मनाक तस्वीर ने सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था व अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। मामला उजागर होने के बाद जहां एंबुलेंस चालक व प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। वहीं जिले के सिविल सर्जन ने जांच कर कार्रवाई करने की बात कही है। स्वास्थ्य विभाग पर राज्य में करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद 21वीं सदी में रोहतास प्रखंड कि इस तस्वीर ने एक साथ सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़ा किया है। अब इस मामले पर सरकार व स्वास्थ्य विभाग की किरकिरी ना हो सके, इसके लिए अधिकारी लीपापोती करने में जुटे हैं।
क्या है मामला-- बताया जाता है, कि रोहतास प्रखंड के पहाड़ी क्षेत्र में बसे भवनवा गांव में आशा कार्यकर्ता द्वारा लोगों को बंध्याकरण ऑपरेशन के लिए जागरूक किया जा रहा था। जिसमें आशा कार्यकर्ता द्वारा ग्रामीणों को यह बताया जा रहा था कि बंध्याकरण ऑपरेशन निशुल्क रूप से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रत्येक बुधवार को होता है। तथा ऑपरेशन उपरांत मरीज को सरकार द्वारा दो हजार रुपया भी दिया जाता है। जिसके बाद गांव के सुमेर उरांव की पत्नी राजमती देवी तथा महेंद्र चेरो की पत्नी सरिता देवी बुधवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर बंध्याकरण का ऑपरेशन कराया। मरीज के परिजनों के अनुसार गुरुवार की सुबह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रबंधन द्वारा बंध्याकरण ऑपरेशन हुए मरीज को घर ले जाने की सलाह दी। परिजनों ने जब इसके लिए एंबुलेंस की मांग की, तो अस्पताल प्रबंधन ने अपनी सुविधा से घर जाने को कह दिया। फिर क्या था सुमेरु उरांव ने खाट की व्यवस्था की और खाट को डोली बना अपने परिजनों के सहारे स्वयं कंधा देकर 7 किलोमीटर की दूरी तय कर पत्नी को अपने घर पहुंचाया। 21वीं सदी में शर्मनाक तस्वीर को देख सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसकी शिकायत अस्पताल प्रबंधन से की। बताया जाता है, कि इसके पूर्व एक अन्य मरीज महेंद्र चेहरों की पत्नी सरिता देवी व अन्य मरीजों को भी परिजन खाट व डोली के सहारे घर पहुचाते देखे गए।
ग्रामीणों की शिकायत--रोहतास प्रखंड के रोहतासगढ़ पंचायत अंतर्गत भवनवा गांव में करीब 40 परिवार गुजर-बसर करते हैं। ग्रामीणों का कहना था कि राज्य व देश भले ही विकसित हो, किंतु आज भी वह आदिम युग की जिंदगी जीते हैं। यही कारण है कि यहां लोगों की स्वास्थ्य व्यवस्था खाट व डोली के सहारे आज भी होती है। जिला व अनुमंडल मुख्यालय से काफी दूर होने के कारण वरीय अधिकारियों का आगमन इस प्रखंड क्षेत्र में कम होता है। जिस कारण स्वास्थ्य विभाग व अन्य विभागों के अधिकारी व कर्मी अपनी मनमानी करते हैं। पूर्व में क्षेत्र के विकास योजनाओं में लूट-खसोटा भ्रष्टाचार की गुंज मुख्यालय तक पहुंच चुकी है। ऐसे में एक बार फिर स्वास्थ्य महकमा की खुली पोल ने सबको हैरत में डाल दिया है। रोगी कल्याण समिति सदस्य कामता यादव का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की मनमानी का नतीजा पहाड़ी क्षेत्र के ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है। शिकायतों के बावजूद भी कार्रवाई की बात तो दूर कोई सुधार भी नहीं होता है।
प्रभारी व कर्मियों के अपने-अपने तर्क-- आशा कार्यकर्ता सुनीता देवी का कहना है, की बार-बार अनुरोध के बाद भी एम्बुलेंस चालक या अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजों को एम्बुलेंस सुविधा नही दी जाती है। जिससे मरीजों को खतरा बना रहता है। एम्बुलेंस चालक सुशील कुमार का तर्क है कि नई व्यवस्था के तहत पटना से कॉल आने के बाद ही वह मरीजों को उनके घर पहुंचा सकते हैं। जबकि एंबुलेंस के नियंत्रण पदाधिकारी नीरज कुमार का कहना है कि चालक को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि ऑपरेशन कराने वाली मरीज या इमरजेंसी वालों को केवल स्वास्थ्य प्रबंधन को जानकारी देकर भी उन्हें घर पहुंचाया जा सकता है। रोहतास पीएचसी प्रभारी मुकेश कुमार का कहना है कि इस तरह की तस्वीर बिल्कुल शर्मनाक है। इसकी जानकारी चालक से ली गई है। इस तरह की घटना के लिए चालक दोषी है। जिसकी रिपोर्ट वह सिविल सर्जन से कर चुके हैं।
कहते हैं अधिकारी-- सिविल सर्जन डॉ सुधीर कुमार का कहना है कि मामला संज्ञान में आने के बाद चिकित्सा प्रभारी व एंबुलेंस नियंत्रक से रिपोर्ट मांगी गई है। भविष्य में इस तरह की शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
