निजी विद्यालयों से बाल संरक्षण आयोग ने इस मामले पर मांगा जवाब

 

अभिभावकों से लॉक डाउन की अवधि की मांगी जा रही पूरी फीस

फीस जमा नहीं करने पर परीक्षा से रोक रहे निजी स्कूल 

गौतम कुमार 

डेहरी। रोहतास

प्राइवेट स्कूलों में फीस के लिए बच्चों को परीक्षा से रोका जा रहा है। लगातार मिल रही शिकायतों के बीच बाल संरक्षण आयोग ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा विभाग से जवाब मांगा है। बताते चलें कि लॉकडाउन के बाद निजी विद्यालयों में बच्चों की कई परेशानियां सामने आई है। कक्षा चार में पढ़ने वाली एक छात्रा की परीक्षा 16 मार्च से है। लेकिन निजी विद्यालय द्वारा उसे एडमिट कार्ड नहीं दिया गया है। अभिभावक पिछले छः महीने की फीस नहीं दे पाए हैं। बच्ची रोती हुई घर आई और बोली कि स्कूल ने कहा है की अगर पूरी फीस नहीं भर पाई तो परीक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा। प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे कई बच्चे और अभिभावक यह त्रासदी झेल रहे हैं। फीस जमा नहीं होने के कारण छात्रों को विद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रताड़ना की सूचना राज्य बाल संरक्षण आयोग तक पहुंच चुकी है। आयोग ने कहा है कि फीस विवाद के कारण बच्चों पर प्राइवेट स्कूल की यह कार्रवाई उत्पीड़न की श्रेणी में आता है। आयोग ने शिकायत पर जवाब मांगते हुए डीईओ को इस पर कार्रवाई का आदेश दिया है। आयोग ने लॉकडाउन के दौरान अभिभावकों की ओर से फीस जमा नहीं करने पर बच्चों को परीक्षा में शामिल नहीं होने देने वाले ऐसे प्राइवेट स्कूलों को चिन्हित कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। ऑल इंडिया अभिभावक संघ के संयोजक राकेश राय ने इस मामले लेकर राज्य सरकार से कार्रवाई की मांग की है। अनुमंडल क्षेत्र में एक सौ से अधिक प्राइवेट स्कूल चल रहा है और कई स्कूलों से लगातार इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। सबसे अधिक शिकायत कटार, तिलौथू, इंद्रपुरी, पानी टंकी, डालमियानगर, पश्चिमी मोहन बिगहा, भरकुड़ियां, अकोढ़ी गोला में चल रहे निजी विद्यालयों से आ रही है। किंतु इस मामले में प्रशासनिक अधिकारी से लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी यह कहते हुए हाथ खड़ा कर दे रहे हैं, कि सरकार का इस पर कोई निर्देश नहीं आया है।लॉक डाउन का सौ फ़ीसदी स्कूल मांग रहे हैं फीस - अभिभावकों का कहना है कि जब पूरे देश मैं लॉकडाउन के दौरान सारे स्कूल जब बंद थे कामकाज भी बंद था तो प्राइवेट स्कूलों ने  बच्चों को पढ़ाई नहीं करने के बावजूद भी फिर किस बात का दिया जाए वही प्राइवेट स्कूल मनमाने ढंग से ट्यूशन फी वही अन्य फी लेने का अधिकार नहीं है जिसमें प्राइवेट स्कूल बच्चों को प्रताड़ित कर रहे हैं की फीस जमा कराओ अभिभावक कहां से फीस जमा करें इस पर सरकार को प्राइवेट स्कूलों पर शिकंजा कसने की जरूरत हैअभिभावकों का शिकायत है कि लॉकडाउन में स्कूल बंद था। किंतु उस अवधि का ट्यूशन फीस से लेकर प्रोजेक्टर फीस समेत वैसे भी हर प्राइवेट स्कूल बच्चों के अभिभावकों से हमेशा  कुछ ना कुछ चार्ज जैसे सफाई के नाम पर तो जनरेटर के नाम पर डेवलपमेंट के नाम पर अभिभावकों से नाजायज वसूली करते रहते हैं अन्य ऑनलाइन के नाम पर फीस स्कूलों द्वारा ली जा रही है। अभिभावक रवि कुमार, सिमल सिंह, शशि शेखर आदि का कहना है कि जिला प्रशासन को आर्थिक व मानसिक दोहन करने वाले निजी विद्यालयों पर लगाम लगाने की आवश्यकता है।कहते है अधिकारी - जिला शिक्षा पदाधिकारी संजीव कुमार ने कहा कि फीस जमा नहीं करने के कारण बच्चों को परीक्षा में शामिल होने से रोका जाना सही नहीं है। अब तक बाल संरक्षण आयोग का पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र प्राप्त होने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी