गौतम कुमार की रिपोर्ट;-
बिहार के आम चुनाव के बाद अब रेलवे में भी चुनाव की बिगुल बज चुका है। रेल मंत्रालय ने रेल संगठनों के मान्यता के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी। रेल संगठनों के मान्यता के लिए 4 दिसंबर और 5 दिसंबर को वोटिंग होगी। घोषित कार्यक्रम के अनुसार 3 नवबंर तक वोटिंग लिस्ट में संशोधन के लिए आपत्ति दर्ज की जा सकती है।5 नवम्बर को फाईल लिस्ट जारी होगी। इसके बाद चुनाव चिन्ह का आवंटन होगा।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के डेहरी अॉन सोन सहित पूरे मंडल में तकरीबन 14000 वोटर हैं। जिसके लिए सासाराम, डेहरी, औरंगाबाद, भभूआ, जपला, गया, डीटीयू सहित कई और जगहों पर मतदान केन्द्र बनाए गए हैं। रेल मंत्रालय के नियमानुसार रेलकर्मियों के 35% मत प्राप्त करने वाले यूनियन ही मान्यता प्राप्त यूनियन का दर्जा पा सकते हैं। यह चुनाव 6 वर्षों के अंतराल पर कराए जाते हैं। पिछले चुनाव में ईस्ट सेन्ट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन तकरीबन 40% मतों के साथ चुनाव जीतने में कामयाब हुई थी। और बाकी रेल संगठनों को मुंह की खानी पड़ी थी। उन्हें तय प्रतिशत का 50% मत भी प्राप्त नहीं हुए थे। पिछले चुनाव में रेलवे की 5 संगठनों ने हिस्सा लिया था। लेकिन ईसीआरकेयू को छोड़ कर कोई भी संगठन निर्धारित वोट लाने में असफल रहे।
ईसीआरकेयू के पूर्व केन्द्रीय सचिव व डेहरी शाखा अध्यक्ष रमेश चन्द्रा ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि रेलवे बोर्ड के द्वारा रेलवे कर्मचारी संगठनों के चुनाव कराने का फैसला देर से ही सही लेकिन स्वागतयोग्य कदम है। यह चुनाव वर्ष 2019 के मार्च-अप्रैल में ही कराया जाना था। लेकिन डेढ साल से येन-केन-प्रकारेण चुनाव को टाला जा रहा था।वहीं ईसीआरकेयू के डेहरी शाखा सचिव एस पी सिंह एवं सहायक सचिव दिनेश प्रसाद ने कहा कि इस बार के चुनाव में भी रेलकर्मियों के अपार समर्थन व प्यार के बदौलत ईसीआरकेयू जीत का परचम फहराने में पुनः कामयाब होगी। पूरे पूर्व मध्य रेलवे में रेलकर्मियों के सबसे भरोसेमंद संगठन ईसीआरकेयू ही है। जो उनके अधिकारों के लिए सदैव तत्पर रहती है और जरूरत पड़ने पर संघर्ष के लिए भी तैयार रहती है।
ज्ञातव्य हो कि पूरे जोन में एक निर्धारित प्रतिशत वोट लाने पर रेलवे के द्वारा उस यूनियन को मान्यता प्रदान की जाती है। मान्यता प्राप्त रेल संगठन को रेलवे से नेगोशिएशन का अधिकार होता है।

