गौतम शर्मा
डेहरी/रोहतास -आज बिहार के लगभग 6400 सलाहकार बिगत दस बर्षो से पंचायत में किसान सलाहकार के रूप में कार्यरत है मैं बता दू कृषि रोड मैप 2008 के विमोचन के समय कृषि बिभाग द्वारा सज्ञान में लिया गया कि पंचायत स्तर पर जनसेवक की भारी कमी या नगण्य स्थिति के कारण कृषि प्रसार एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य संभव नही है जिसे मद्देनजर कृषि बिभाग द्वारा जनसेवक की जगह किसान सलाहकार को बहाल किया गया।
मैं यह भी बता दु किसान सलाहकार की बहाली की प्रकिरिया विज्ञापन की माध्यम से जिला पदाधिकारी द्वारा सात सदस्यीय गठित टीम द्वारा चयन का कार्य किया गया।जिनमे किसान सलाहकार की शैक्षणिक योग्यता न्यूनतम इंटर साइंस और इंटर कृषि निर्धारित किया गया और आज किसान सलाहकार के रूप में इस तरह के योग्यता धारी किसान सलाहकार कृषि बिभाग में कार्यरत है।
किसान सलाहकार को प्रारम्भ में मात्र 2500 सौ रुपये पर 4 घण्टे कार्य दिवस परामर्श केंद्र संचालन एवं पारा कृषि कर्मी / अंशकालिक कर्मीके रूप में रखा गया लेकिन बिभाग द्वारा बहाली के प्रारम्भ अवस्था में से ही कृषि बिभाग के सभी कार्य जैसे बीज वितरण, मिट्टी नमूना संग्रहण, यंत्रीकरण, बिजोउपचार, किसान भाइयों के खेतों पर जाकर किट ब्याधियों की पहचान कर रोकथाम के उपाय, किसान चौपाल का संचालन, तमाम तरह के सर्वेक्षण के साथ साथ गैर बिभागीय कार्य जैसे जनगणना, पशुगणना, जल जीवन हरियाली के तहत आहर पोखर गणना, पर्व त्योहार के समय समाजिक बिधि व्यवस्था के लिये मजिस्ट्रेट ड्यूटी, सभी तरह के चुनाव में पोलिंग ऑफिसर बनाकर चुनाव कार्य करवाना, नशा मुक्ति दहेज उत्पीड़न जैसे मानव श्रीखला में मजिस्ट्रेट के रूप में तैनाती,राशन कूपन वितरण, राशन किराशन वितरण, धान गेंहू अधिप्राप्ति, आदि सभी कार्य दस बर्षो से एक सरकारी कर्मी की तरह लिया गया और वर्तमान में भी इस कोरोना जैसी संक्रमण काल मे सभी किसान सलाहकार को मुख्यसचिव एवं सरकार के आदेशानुसार कोरोटाइन सेंटर पर मजिस्ट्रेट के रूप में बिना किसी सुविधा मुहैया के प्रतिनियुक्त किया गया और आज इसी संक्रमण काल मे मुख्यमंत्री जी की ड्रीम प्रोजेक्ट हर खेत पानी का सर्वेक्षण कार्य कराने के लिये लगाया गया है यह कार्य मोबाइल एप आधारित कार्य है, और यह कार्य उच्च गुणवत्ता वाली मोबाइल के बिना संभव नही है।
एक तरफ बिभाग के द्वारा सभी कार्य पूर्णकालिक कर्मी की तरह लिया जा रहा है तो वही दूसरी तरफ हम सभी आज भी सरकार के राज्यादेश संख्या 1304 के नियम एवं कागज में मात्र एक प्रगतिशील किसान के रूप में दर्शाकर मानशिक गुलाम एवं शारीरिक शोषण किया जा रहा है।इस संदर्भ में कृषि सचिव एवं कृषि निर्देशक से मिलकर अपनी समस्याओं से अवगत कराने के बाद भी कोई हमलोगों की बात को अनसुना किया जा रहा है।तो वहीइस तरह के कार्य लेने के लिये कृषि बिभाग में कार्यरत ,कृषि समन्वयक, atm, btm एवं सभी bao को एंड्रायड मोबाइल एवं टैबलेट दिया गया है तो हमे मात्र12000 हजार मानदेय पर बिभाग स्वयम से उच्च गुणवत्ता वाली मोबाइल सेट खरीदने पर मजबूर कर रही है जिससे परिवार में आर्थिक तंगी उतपन्न होना स्वभाविक है निचले तबके के पदाधिकारी से इस तरह के समस्या रखने पर सीधे चयन मुक्त करने की धमकी दी जा रही है।
इससे आक्रोशित बिहार के सभी सलाहकार 16 अगस्त से बिभाग एवं सरकार के तानाशाह रैवया से विवश होकर काला पट्टी एवं कार्य बहिष्कार करने का निर्णय संघ की ओर से लिया गया है।इस बीच हम सभी की मांग पूर्ण नही होती है तो उग्र आंदोलन,पंचायत के किसान एव जनमानस से मिलकर सरकार की गलत नीतियों को भी उजागर करने का कार्य करेंगे।
हम सभी की मांग है।
(1)किसान सलाहकार को पूर्णकालिक (8)घण्टे की कर्मी माना जाए।
(2)उचित मानदेय कम से कम 25000रु दी जाए
(3)तमाम तरह की तकनीकी कार्य एवं सर्वेक्षण हेतु तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराई जाए
(4)किसान सलाहकारो को epf से आच्छादित किया जाय।
मौके पर रबी कुमार, ऋषिकेश कुमार, मिथलेश कुमार, रजनीश कुमार, शैलेन्द्र कुमार, हरिशंकर सिंह, श्रीनिवास जी हरेंद्र कुमार इत्यादि अन्य लोग शामिल थे
