विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल ने संकल्प दिवस मनाया गया।

गौतम शर्मा 

डेहरी /रोहतास  विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल डेहरी नगर के द्वारा ऐनिकट काली मंदिर के प्रागंण मे अखण्ड भारत संकल्प दिवस मनाया गया। covid19 को ध्यान में रखते हुए पूरी सावधानी एव समाजिक दूरी के साथ कार्यक्रम में सभी लोगों ने अखंड भारत के चित्र के आगे पुष्पांजलि अर्पित कर अखंड भारत के प्रति अपनी भावना का इजहार किया। बजरंगदल जिला सहसंयोजक गोपी कुमार ने कहा कि विहिप और बजरंग दल अखंड भारत संकल्प दिवस का कार्यक्रम भारत भर में हर जगह पर आयोजित करता है भारत के अखंड स्वरूप को तथा उसके सम्मान को विश्व में पुन:स्थापित करना चाहते हैं आज से पांच हजार साल पहले हिदू राजाओं का संपूर्ण राज्याभिषेक जम्बू द्वीप पर शासन होता था, जो पश्चिम में अफगानिस्तान, पाकिस्तान, पाक गुलाम कश्मीर से लेकर पूर्व में नेपाल, भूटान, म्यांमार तक और उत्तर में अक्साई चीन, तिब्बत से लेकर दक्षिण में श्रीलंका तक फैला हुआ था।  कालांतर में अपनी क्षमताओं और आपसी फूट के कारण यह हिमालय से हिंदमहासागर तक छोटा सा जमीन का टुकड़ा रह गया है। ततपश्चात वहां उपस्थित सभी लोगों ने कार्यक्रम में भाग लेकर अखंड भारत का संकल्प धारण किया। विश्व हिन्दू परिषद् धर्म प्रसार जिला अध्यक्ष अंशुल कश्यप ने कहा कि अखण्ड भारत महज सपना नहीं, श्रद्धा है, निष्ठा है. जिन आंखों ने भारत को भूमि से अधिक माता के रूप में देखा हो, जो स्वयं को इसका पुत्र मानता हो, जो प्रात: उठकर “समुद्रवसने देवी पर्वतस्तन मंडले, विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यम् पादस्पर्शं क्षमस्वमे. “कहकर उसकी रज को माथे से लगाता हो, वन्देमातरम् जिनका राष्ट्रघोष और राष्ट्रगान हो, ऐसे असंख्य अंत:करण मातृभूमि के विभाजन की वेदना को कैसे भूल सकते हैं, अखण्ड भारत के संकल्प को कैसे त्याग सकते हैं? किन्तु लक्ष्य के शिखर पर पहुंचने के लिये यथार्थ की कंकरीली-पथरीली, कहीं कांटे तो कहीं दलदल, कहीं गहरी खाई तो कहीं रपटीली चढ़ाई से होकर गुजरना ही होगा। बजरंग दल नगर संयोजक दीपक दास ने कहा कि 15 अगस्त को हमें आजादी मिली और वर्षों की परतंत्रता की रात समाप्त हो गयी. किन्तु स्वातंत्रा के आनंद के साथ-साथ मातृभूमि के विभाजन का गहरा घाव भी सहन करना पड़ा. 1947 का विभाजन पहला और अन्तिम विभाजन नहीं है. भारत की सीमाओं का संकुचन उसके काफी पहले शुरू हो चुका था. सातवीं से नवीं शताब्दी तक लगभग ढाई सौ साल तक अकेले संघर्ष करके हिन्दू अफगानिस्तान इस्लाम के पेट में समा गया. हिमालय की गोद में बसे नेपाल, भूटान आदि जनपद अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण मुस्लिम विजय से बच गये. अपनी सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिये उन्होंने राजनीतिक स्वतंत्रता का मार्ग अपनाया पर अब वह राजनीतिक स्वतंत्रता संस्कृति पर हावी हो गयी है. श्रीलंका पर पहले पुर्तगाल, फिर हॉलैंड और अन्त में अंग्रेजों ने राज्य किया और उसे भारत से पूरी तरह अलग कर दिया।  विश्व हिन्दू परिषद् धर्म प्रसार जिला प्रमुख भोला चौहान ने कहा कि भारत के सामने तेरह सौ वर्ष से भारत की धरती पर जो वैचारिक संघर्ष चल रहा था, उसी की परिणति 1947 के विभाजन में हुई. पाकिस्तानी टेलीविजन पर किसी ने ठीक ही कहा था कि जिस दिन आठवीं शताब्दी में पहले हिन्दू ने इस्लाम को कबूल किया, उसी दिन भारत विभाजन के बीज पड़ गये थे। इस कार्यक्रम मे विश्व हिन्दू परिषद् धर्म प्रसार जिला मंत्री अर्जुन प्रसाद केशरी, बजरंग दल नगर सह संयोजक चंदन गुप्ता, अखाड़ा प्रमुख नीरज कुमार, विश्व हिन्दू परिषद् नगर मंत्री धर्मवीर सिंह, मातृशक्ति नगर संयोजिका दिव्या सिन्हा, अरविंद कुमार, मनीष कुमार, डॉ रशमी रेखा, ज्योति देवी, देवा कुमार उपस्थित हुए।