रेलवे,नीजिकरण,नई भर्ती बंद करने के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन




गौतम कुमार
डेहरी/रोहतास
औल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन तथा ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन   ने भारतीय रेल का नीजिकरण करने के केन्द्र सरकार के फैसले के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ने का फैसला किया है।
ईस्ट सेन्ट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन के केन्द्रीय उपाध्यक्ष डी पी यादव ने आंदोलन की घोषणा करते हुए कहा कि देश में नीजि ट्रेन चलाने एवं नई बहाली बंद करने के खिलाफ देशभर में बड़े पैमाने पर आंदोलन छेडा जाएगा।   केंद्र सरकार श्रमिक विरोधी नीतियों के कारण रोज नए नए  तुगलकी फरमान जारी कर रही है। जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अभी रेलवे बोर्ड ने नए पदों का सृजन को अगले आदेश तक स्थगित करने  तथा विगत 2 वर्षों के अंतर्गत विभिन्न पदों की भर्ती प्रक्रिया जिसे अभी तक  पूर्ण  नहीं किया गया  है को रिव्यू करने का निर्णय लिया गया है।जो कि श्रमिक विरोधी होने का प्रमाण है। रेल मंत्रालय 50% पदों को भी सरेंडर करने का निर्णय लिया है जो कि सरासर गुनाह है।
केन्द्रीय उपाध्यक्ष डी पी यादव ने नीजिकरण को भारत सरकार का आत्मघाती  कदम बताते हुए कहा  कि भारतीय रेलवे नेटवर्क पर पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन के लिए प्राइवेट इन्वेस्टर को आमंत्रित करना, देश को गुलाम बनाने जैसा कदम है जिसकी चौतरफा निंदा की जानी चाहिए।    109 रूटों पर पैसेंजर ट्रेनों का संचालन के लिए प्राइवेट ऑपरेटरों को आमंत्रित किया जाना। इस बार का सबूत है कि भारतीय रेलवे को केन्द्र सरकार पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर मुट्ठी भर साहूकारों के हाथों की कठपुतली बनाने पर आमादा है। इससे रेलकर्मियों एवं गरीब देशवासियों पर भी बूरा  प्रभाव पड़ेगा।
चर्चित यूनियन नेता डी पी यादव ने केन्द्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अगर नीजिकरण की नीतियां इतनी ही अच्छी है तो सबसे पहले संसद का नीजिकरण किया जाना चाहिए। श्रमिकों का पेंशन बंद करने वाले अपनी वेतन दिन दुना और रात चौगुना वृद्धि करने में लगे हैं। वहीं श्रमिकों के पेट पर लात मारते हुए उनके मंहगाई भत्ता को फ्रिज कर दिया गया। अब  रेलकर्मी एवं उनके बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। जिसे बर्दाश्त कर पाना मुश्किल है।इसीलिए अॉल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन के आह्वान पर ईस्ट सेन्ट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन के द्वारा रेलवे बोर्ड के निर्णयों के खिलाफ व्यापक आंदोलन करने का फैसला किया गया है । यदि भारत सरकार  श्रमिकों के खिलाफ  लिए गए निर्णयों को वापस नहीं लेती है तो वैसी स्थिति में ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। इसके लिए भारत सरकार को तथा रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के महामंत्री कॉमरेड शिव गोपाल मिश्रा द्वारा सरकार के निर्णयों के खिलाफ  लिखित सूचना दे दी गई है।