गौतम कुमार
डेहरी/रोहतास
कैडर मर्जर और मंहगाई भत्ता बंद करने के विरोध में रेलकर्मियों ने मनाया काला दिवस।
डेहरी डालमियानगर अॉल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन के आह्वान पर ईस्ट सेन्ट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन ने रेलकर्मियों के मंहगाई भत्ता फ्रिज करने एवं कैडर मर्जर के विरोध में आज ड्यूटी के दौरान काला बिला लगाकर काला दिवस मनाया।
ईस्ट सेन्ट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन के केन्द्रीय उपाध्यक्ष डी पी यादव ने रेलकर्मियों को भेजे अपने संदेश में कहा है कि मल्टी स्कीलिंग और कॉस्ट कटिंग के नाम पर भारतीय रेल में कर्मचारियों की संख्या कम करने की साजिश को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। कोरोना के दौरान राहत पैकेज के नाम पर वित्तमंत्री चार दिन लगातार प्रेस कान्फ्रेंस करतीं रहीं, लेकिन उनके राहत पैकेज लाभ मिलना तो दूर आज तक लोगो को उनका पैकेज समझ में ही नहीं आया। सच तो ये है कि उन्होंने सिर्फ लोन मेला आर्गनाइज किया। जो बात हमें समझ आई वो सिर्फ इतना कि सरकारी क्षेत्र को वो निजी हांथों में सौपने का रास्ता बना रहीं है, जिसका हमें मजबूती से विरोध करना है। जब भारतीय रेल के कर्मचारी कोरोना जैसी महामारी से लड़ने में व्यस्त है, उस समय सरकार पिछले रास्ते से हमें नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है। पहले तो कॉस्ट कटिंग के नाम पर कमेटी बनाकर कर्मचारियों की संख्या कम करने की बात हो रही थी, अब एक और शिगूफा छोड़ा गया है, मल्टी स्कीलिंग और कैडर मर्जर के नाम पर ।भारतीय रेल में जहां अभी 13.26 लाख कर्मचारी है, उन्हें कम करके आठ लाख किए जाने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने ने कहा है कि मल्टी स्कीलिंग और कैडर मर्जर के जरिए न सिर्फ कर्मचारियों की संख्या कम होगी, बल्कि एक एक कर्मचारी पर चार पांच कर्मचारियों के काम का बोझ लाद दिया जाएगा।एक ही कर्मचारी से कई जगह जरूरत के अनुसार काम कराया जाएगा।नई भर्ती पर असर पड़ेगा।
लाँकडाउन के बाद रेल कर्मचारी तो इस काम में लगे थे कि कैसे अधिक से अधिक मालगाड़ी, पार्सल ट्रेन का संचालन कर देश भर में आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की कमी न होने दे, इतना ही नहीं जब प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने में राज्य सरकारें फेल हो गई तो रेल कर्मचारियों ने 72 लाख प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाया । खुद प्रधानमंत्री ने मन की बात में रेलकर्मचारियों को फ्रंट लाइन कोरोना वारियर्स बताया, लेकिन कोरोना वारियर्स की पीठ थपथपाने के बजाए, पीठ पर छूरा भोंकने का काम किया गया। एक आदेश जारी कर डीए को फ्रीज करने का फरमान सुना दिया गया। वित्तमंत्री ने निजीकरण की बात कह कर और जले पर नमक डालने का काम किया गया। पुरानी पेंशन की बहाली और निजीकरण के खिलाफ हम पहले से ही लड़ाई लड़ रहे हैं, बहरहाल अब हमें अपनी ताकत दिखानी ही होगी।
वहीं ईसीआरकेयू डेहरी शाखा के सचिव एस पी सिंह एवं रमेश चन्द्रा के नेतृत्व में सभी रेलकर्मियों ने अपने ड्यूटी के दौरान काला बिला लगाकर केन्द्र सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए आज का दिन काला दिवस के रूप में मनाया। इस अवसर पर विजय बहादुर सिंह, अजीत कुमार, अमरेन्द्र कुमार, प्रमोद कुमार यादव, अशोक कुमार, जिमंदार प्रसाद सहित यूनियन से जुड़े कई रेलकर्मी और नेता उपस्थित थे।
डेहरी/रोहतास
कैडर मर्जर और मंहगाई भत्ता बंद करने के विरोध में रेलकर्मियों ने मनाया काला दिवस।
डेहरी डालमियानगर अॉल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन के आह्वान पर ईस्ट सेन्ट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन ने रेलकर्मियों के मंहगाई भत्ता फ्रिज करने एवं कैडर मर्जर के विरोध में आज ड्यूटी के दौरान काला बिला लगाकर काला दिवस मनाया।
ईस्ट सेन्ट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन के केन्द्रीय उपाध्यक्ष डी पी यादव ने रेलकर्मियों को भेजे अपने संदेश में कहा है कि मल्टी स्कीलिंग और कॉस्ट कटिंग के नाम पर भारतीय रेल में कर्मचारियों की संख्या कम करने की साजिश को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। कोरोना के दौरान राहत पैकेज के नाम पर वित्तमंत्री चार दिन लगातार प्रेस कान्फ्रेंस करतीं रहीं, लेकिन उनके राहत पैकेज लाभ मिलना तो दूर आज तक लोगो को उनका पैकेज समझ में ही नहीं आया। सच तो ये है कि उन्होंने सिर्फ लोन मेला आर्गनाइज किया। जो बात हमें समझ आई वो सिर्फ इतना कि सरकारी क्षेत्र को वो निजी हांथों में सौपने का रास्ता बना रहीं है, जिसका हमें मजबूती से विरोध करना है। जब भारतीय रेल के कर्मचारी कोरोना जैसी महामारी से लड़ने में व्यस्त है, उस समय सरकार पिछले रास्ते से हमें नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है। पहले तो कॉस्ट कटिंग के नाम पर कमेटी बनाकर कर्मचारियों की संख्या कम करने की बात हो रही थी, अब एक और शिगूफा छोड़ा गया है, मल्टी स्कीलिंग और कैडर मर्जर के नाम पर ।भारतीय रेल में जहां अभी 13.26 लाख कर्मचारी है, उन्हें कम करके आठ लाख किए जाने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने ने कहा है कि मल्टी स्कीलिंग और कैडर मर्जर के जरिए न सिर्फ कर्मचारियों की संख्या कम होगी, बल्कि एक एक कर्मचारी पर चार पांच कर्मचारियों के काम का बोझ लाद दिया जाएगा।एक ही कर्मचारी से कई जगह जरूरत के अनुसार काम कराया जाएगा।नई भर्ती पर असर पड़ेगा।
लाँकडाउन के बाद रेल कर्मचारी तो इस काम में लगे थे कि कैसे अधिक से अधिक मालगाड़ी, पार्सल ट्रेन का संचालन कर देश भर में आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की कमी न होने दे, इतना ही नहीं जब प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने में राज्य सरकारें फेल हो गई तो रेल कर्मचारियों ने 72 लाख प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाया । खुद प्रधानमंत्री ने मन की बात में रेलकर्मचारियों को फ्रंट लाइन कोरोना वारियर्स बताया, लेकिन कोरोना वारियर्स की पीठ थपथपाने के बजाए, पीठ पर छूरा भोंकने का काम किया गया। एक आदेश जारी कर डीए को फ्रीज करने का फरमान सुना दिया गया। वित्तमंत्री ने निजीकरण की बात कह कर और जले पर नमक डालने का काम किया गया। पुरानी पेंशन की बहाली और निजीकरण के खिलाफ हम पहले से ही लड़ाई लड़ रहे हैं, बहरहाल अब हमें अपनी ताकत दिखानी ही होगी।
वहीं ईसीआरकेयू डेहरी शाखा के सचिव एस पी सिंह एवं रमेश चन्द्रा के नेतृत्व में सभी रेलकर्मियों ने अपने ड्यूटी के दौरान काला बिला लगाकर केन्द्र सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए आज का दिन काला दिवस के रूप में मनाया। इस अवसर पर विजय बहादुर सिंह, अजीत कुमार, अमरेन्द्र कुमार, प्रमोद कुमार यादव, अशोक कुमार, जिमंदार प्रसाद सहित यूनियन से जुड़े कई रेलकर्मी और नेता उपस्थित थे।
