गौतम कुमार शर्मा
डेहरी/रोहतास
कोरोना महामारी व लॉक डाउन को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बट सावित्री व्रत की पूजा संपूर्ण व्रत कथा और पूजा विधि द्वारा की गई इस बट सावित्रि व्रत में कहा जाता है कि वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा जी तने में भगवान विष्णु का और डालियों और पत्तियों में भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है व्रत रखने वाले को मां सावित्री और सत्यवान की कथा पढ़ना सुनना जरूरी होती है जस्ट अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं हिंदू धर्म में महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए कई व्रत रखती हैं। डेहरी डालमियानगर ऐसे ही व्रतों में से एक है वट सावित्रि व्रत। विवाहित महिलाएं अपने सुहाग के दीर्घायु होने के लिए व्रत उपासना करती हैं। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो स्त्री उस व्रत को सच्ची निष्ठा से रखती है उसे न सिर्फ पुण्य की प्राप्ति होती है बल्कि उसके पति पर आई सभी परेशानियां भी दूर हो जाती हैं।
वट सावित्री व्रत का महत्व पूजा में मान्यता है कि बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर ले आई थी। इस व्रत का महिलाओं के बीच विशेष महत्व बताया जाता है। इस दिन वट बड़, बरगद का पूजन होता है। इस व्रत को स्त्रियां अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगलकामना से करती हैं।
डेहरी/रोहतास
कोरोना महामारी व लॉक डाउन को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बट सावित्री व्रत की पूजा संपूर्ण व्रत कथा और पूजा विधि द्वारा की गई इस बट सावित्रि व्रत में कहा जाता है कि वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा जी तने में भगवान विष्णु का और डालियों और पत्तियों में भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है व्रत रखने वाले को मां सावित्री और सत्यवान की कथा पढ़ना सुनना जरूरी होती है जस्ट अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं हिंदू धर्म में महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए कई व्रत रखती हैं। डेहरी डालमियानगर ऐसे ही व्रतों में से एक है वट सावित्रि व्रत। विवाहित महिलाएं अपने सुहाग के दीर्घायु होने के लिए व्रत उपासना करती हैं। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो स्त्री उस व्रत को सच्ची निष्ठा से रखती है उसे न सिर्फ पुण्य की प्राप्ति होती है बल्कि उसके पति पर आई सभी परेशानियां भी दूर हो जाती हैं।
वट सावित्री व्रत का महत्व पूजा में मान्यता है कि बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर ले आई थी। इस व्रत का महिलाओं के बीच विशेष महत्व बताया जाता है। इस दिन वट बड़, बरगद का पूजन होता है। इस व्रत को स्त्रियां अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगलकामना से करती हैं।
