कमलेश कुमार मिश्रा
डेहरी रोहताश
केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता रोकना अनुचित, डेहरी डालमियानगर ईस्ट सेन्ट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन के केन्द्रीय उपाध्यक्ष डी पी यादव ने केंद्रीय कर्मचारियों की महंगाई भत्ता जून 2021 तक रोके जाने के भारत सरकार के फैसले का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि कि महंगाई भत्ता रोकना केन्द्रीय कर्मचारियों के साथ ज्यादती और अनुचित है।
उन्होंने कहा कि देश के तकरीबन 13 लाख रेलकर्मियों ने कोरोना संकट में अपना एक दिन का वेतन तकरीबन 151 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में योगदान करते हुए कोरोनावायरस के संक्रमण के दौर में अपनी जान को जोखिम में डालकर चौबीसों घंटे गुड्स, पार्सल एवं अन्य विशेष ट्रेनों के संचालन में अपनी सेवाएं दे रही हैं। ऐसे में महंगाई भत्ता रोका जाना तुगलकी फरमान है जिसे लॉकडाउन के बाद सरकार से यूनियन वार्ता करेगी और इसे आदेश को वापस लेने की मांग करेगी।
उन्होंने कडे लहजे में केन्द्र सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि नीजिकरण को बढ़ावा देने वाली सरकार को आज आंखें खोलकर देखने की जरूरत है कि यही सरकारी सेवक इस वैश्विक महामारी में अपनी जान की परवाह किए बगैर इस संकट की घड़ी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं जबकि नीजिकरण वाले भाग खड़े हुए।
डेहरी रोहताश
केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता रोकना अनुचित, डेहरी डालमियानगर ईस्ट सेन्ट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन के केन्द्रीय उपाध्यक्ष डी पी यादव ने केंद्रीय कर्मचारियों की महंगाई भत्ता जून 2021 तक रोके जाने के भारत सरकार के फैसले का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि कि महंगाई भत्ता रोकना केन्द्रीय कर्मचारियों के साथ ज्यादती और अनुचित है।
उन्होंने कहा कि देश के तकरीबन 13 लाख रेलकर्मियों ने कोरोना संकट में अपना एक दिन का वेतन तकरीबन 151 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में योगदान करते हुए कोरोनावायरस के संक्रमण के दौर में अपनी जान को जोखिम में डालकर चौबीसों घंटे गुड्स, पार्सल एवं अन्य विशेष ट्रेनों के संचालन में अपनी सेवाएं दे रही हैं। ऐसे में महंगाई भत्ता रोका जाना तुगलकी फरमान है जिसे लॉकडाउन के बाद सरकार से यूनियन वार्ता करेगी और इसे आदेश को वापस लेने की मांग करेगी।
उन्होंने कडे लहजे में केन्द्र सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि नीजिकरण को बढ़ावा देने वाली सरकार को आज आंखें खोलकर देखने की जरूरत है कि यही सरकारी सेवक इस वैश्विक महामारी में अपनी जान की परवाह किए बगैर इस संकट की घड़ी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं जबकि नीजिकरण वाले भाग खड़े हुए।
