अनिल कुमार
डेहरी /रोहतास
लॉक डाउन में ठप पड़े मीट - मछली के कारोबार को कुछ शर्तों के साथ डेहरी अनुमंडल प्रशासन ने शुरू करने का इजाजत कुछ दिनों पहले दिया था और अनुमंडल पदाधिकारी लाल ज्योति नाथ शाहदेव ने इन व्यवसायियों से सोशल डिस्टेंस एवं साफ सफाई के निर्देश का कड़ाई से पालन करने को कहा था. केंद्र सरकार ने मीट - मछली एवं अंडे के उत्पादन एवं उनके कारोबार को अत्यावश्यक वस्तु एवं सेवा में शामिल किया है. राज्य सरकार ने भी केंद्र सरकार के नियमों को पालन करते हुए इन्हें बिक्री करने का अनुमति दे दी. लेकिन मीट - मछली के दुकानों पर ना तो सोशल डिस्टेंस का ख्याल रखा जा रहा है .और ना ही सफाई का जब से मीट मछली और मुर्गा अंडा का कारोबार लॉक डाउन में शुरू हुआ है .तब से मुर्गा अंडा का दाम वृद्धि तो नहीं देखी जा रही है.मुर्गा और अंडा खाने से लोग परहेज कर रहे हैं इसलिए मीट और मछली पर लोग ज्यादा ध्यान दे रहे हैं इसलिए मीट और मछली का दाम शहर में दोगुनी कीमत पर बेची जा रही .मछली मार्केट होने के बाद भी मछली व्यवसाय अपनी मछलियों को लेकर मछली मार्केट में नहीं आ कर उसे बालगोविंद बिगहा के सोन तट पर ही बेच रहे हैं .यहां पर ना तो सोशल डिस्टेंस का कोई पालन कर रहा है .और ना ही यहां सर सफाई का ख्याल रखा जा रहा है .पहले मछली मार्केट में मछुआरे मछली लेकर आते थे जहां वह अपने अपने मछलियों को बेचा करते थे और शहर के लोग आकर वहीं से खरीदते थे लेकिन आज यह सोन नदी के किनारे ही मछली बेच रहे हैं. क्योंकि लोग सोन नदी के किनारे ही पहुंच जा रहे हैं जो मछली पहले 100 रु किलो बिकती थी अब वह मछली 300 किलो बिक रही है जो मछली 300 रु किलो बिकती थी वह मछली 700 रू किलो बिक रही है और लोग यहां पर आकर उसे खरीद भी रहे हैं वही मीट मंडी का भी यही स्थिति है मीट व्यवसाय जो मीट पहले 400 रू से 500रु किलो बिकता था अब वह 600 से 800 रू किलो बेच रहे हैं मनमानी रेट पर मीट - मछली बेचे जा रहे हैं इसकी भनक अधिकारियों को भी है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है .डेहरी पडाव मैदान के मीट बजार मे व्यवसाय सफाई का भी ख्याल नहीं रखते यहां पर मखिया भिन्न-भिन्न आती रहती है. लोग बताते हैं कि मीट की कीमत ज्यादा मीट व्यवसाई ले रहे हैं ज्यादा रेट का विरोध करने पर वह बोल रहे हैं कि बकरे मिल नहीं रहे हैं जो बकरे मिल रहे हैं ओ ज्यादा कीमत में खरीदकर लाया जा रहा है इसलिए उसे हम ज्यादा दाम में बेच रहे हैं .वही मछली की कीमत ज्यादा ग्राहक होने के कारण वहां के मछुआरे उसकी कीमत मनमानी ले रहे हैं जिससे मीट व मछली विषयों का इस समय चांदी ही चांदी है.
डेहरी /रोहतास
लॉक डाउन में ठप पड़े मीट - मछली के कारोबार को कुछ शर्तों के साथ डेहरी अनुमंडल प्रशासन ने शुरू करने का इजाजत कुछ दिनों पहले दिया था और अनुमंडल पदाधिकारी लाल ज्योति नाथ शाहदेव ने इन व्यवसायियों से सोशल डिस्टेंस एवं साफ सफाई के निर्देश का कड़ाई से पालन करने को कहा था. केंद्र सरकार ने मीट - मछली एवं अंडे के उत्पादन एवं उनके कारोबार को अत्यावश्यक वस्तु एवं सेवा में शामिल किया है. राज्य सरकार ने भी केंद्र सरकार के नियमों को पालन करते हुए इन्हें बिक्री करने का अनुमति दे दी. लेकिन मीट - मछली के दुकानों पर ना तो सोशल डिस्टेंस का ख्याल रखा जा रहा है .और ना ही सफाई का जब से मीट मछली और मुर्गा अंडा का कारोबार लॉक डाउन में शुरू हुआ है .तब से मुर्गा अंडा का दाम वृद्धि तो नहीं देखी जा रही है.मुर्गा और अंडा खाने से लोग परहेज कर रहे हैं इसलिए मीट और मछली पर लोग ज्यादा ध्यान दे रहे हैं इसलिए मीट और मछली का दाम शहर में दोगुनी कीमत पर बेची जा रही .मछली मार्केट होने के बाद भी मछली व्यवसाय अपनी मछलियों को लेकर मछली मार्केट में नहीं आ कर उसे बालगोविंद बिगहा के सोन तट पर ही बेच रहे हैं .यहां पर ना तो सोशल डिस्टेंस का कोई पालन कर रहा है .और ना ही यहां सर सफाई का ख्याल रखा जा रहा है .पहले मछली मार्केट में मछुआरे मछली लेकर आते थे जहां वह अपने अपने मछलियों को बेचा करते थे और शहर के लोग आकर वहीं से खरीदते थे लेकिन आज यह सोन नदी के किनारे ही मछली बेच रहे हैं. क्योंकि लोग सोन नदी के किनारे ही पहुंच जा रहे हैं जो मछली पहले 100 रु किलो बिकती थी अब वह मछली 300 किलो बिक रही है जो मछली 300 रु किलो बिकती थी वह मछली 700 रू किलो बिक रही है और लोग यहां पर आकर उसे खरीद भी रहे हैं वही मीट मंडी का भी यही स्थिति है मीट व्यवसाय जो मीट पहले 400 रू से 500रु किलो बिकता था अब वह 600 से 800 रू किलो बेच रहे हैं मनमानी रेट पर मीट - मछली बेचे जा रहे हैं इसकी भनक अधिकारियों को भी है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है .डेहरी पडाव मैदान के मीट बजार मे व्यवसाय सफाई का भी ख्याल नहीं रखते यहां पर मखिया भिन्न-भिन्न आती रहती है. लोग बताते हैं कि मीट की कीमत ज्यादा मीट व्यवसाई ले रहे हैं ज्यादा रेट का विरोध करने पर वह बोल रहे हैं कि बकरे मिल नहीं रहे हैं जो बकरे मिल रहे हैं ओ ज्यादा कीमत में खरीदकर लाया जा रहा है इसलिए उसे हम ज्यादा दाम में बेच रहे हैं .वही मछली की कीमत ज्यादा ग्राहक होने के कारण वहां के मछुआरे उसकी कीमत मनमानी ले रहे हैं जिससे मीट व मछली विषयों का इस समय चांदी ही चांदी है.
