गौतम कुमार शर्मा
डेहरी/ रोहतास
हिंदी रंगमंच दिवस के अवसर पर अभिनव कला संगम से जुड़े रंगकर्मियों ने शुक्रवार की रात व्हाट्सएप संवाद के जरिये रंगमंच परिचर्चा ग्रुप के माध्यम से हिंदी रंगमंच दिवस मनाया। सर्वप्रथम अध्यक्ष प्रोफेसर रणधीर सिन्हा ने वर्तमान में कोरोनावायरस से बचाव के लिए लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन करने का संदेश देते हुए हिन्दी रंगमंच दिवस की महत्ता पर अपने विचार रखे। रंगमंच परिचर्चा का शुभारंभ करते हुए उन्होंने हिंदी रंगमंच दिवस के मौके पर जिले के सभी कलाकार, साहित्यकार बंधुओं, कला प्रेमी एवं रंगकर्मी भाइयों को बधाई एवं शुभकामना दी l परिचर्चा में शामिल संस्था के संस्थापक सलाहकार रामकृष्ण शर्मा ने रंगमंच परिचर्चा में बताया कि रंगकर्म में कौशल पूर्ण समायोजन कलाकारों में होनी चाहिए l कल्पनाशील निर्देशक, चिंतन ,समर्पित ,कलाकारों की भूमिका अवश्य होनी चाहिए। उन्होंने रंगमंच के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला और रंगमंच दिवस की बधाई दी। संयोजक आशुतोष श्रीवास्तव व महासचिव को चंद्र कुशवाहा ने रंगमंच के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रंगमंच पर हिंदी का पहला नाटक शीतला प्रसाद त्रिपाठी कृत'' जानकी मंगल था। इसका मंचन बनारस के रॉयल थिएटर में 3 अप्रैल 1868 को किया गया था। व्हाट्सएप में आयोजित परिचर्चा में वरिष्ठ रंगकर्मी संस्था के पूर्व अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता उर्फ काका भैया ने सबको हिंदी रंगमंच की बधाई देते हुए हिंदी रंगमंच पर भी विस्तार रूप से प्रकाश डाला। l व कहां की रंगमंच का इतिहास वैदिक काल से रहा है l सर्वप्रथम असुर विजय तथा अमृत मंथन आदि नाटक देवताओं द्वारा की गई l जिसका कार्यभार भरतमुनि को सौंपा गया। उस समय संस्कृत का बोलबाला था l वास्तव में हिंदी नाटक का श्रेय भारतेंदु हरिश्चंद्र को जाता है l संस्था के अन्य सदस्यों ने हिंदी रंगमंच दिवस की बधाई देते हुए वर्तमान समय में कोरोना संक्रमण से बचने की जरूरत जतायी। परिचर्चा में सचिव कमलेश कुमार कोषाध्यक्ष संतोष नीरज, अंकेक्षक शशि श्रीवास्तव, मुन्ना सिंह, अधिवक्ता मनोज अज्ञानी, मुकुल मणि, संजय यादव, कृष्णा यादव, कुंदन कुमार समेत अन्य शामिल थे।
डेहरी/ रोहतास
हिंदी रंगमंच दिवस के अवसर पर अभिनव कला संगम से जुड़े रंगकर्मियों ने शुक्रवार की रात व्हाट्सएप संवाद के जरिये रंगमंच परिचर्चा ग्रुप के माध्यम से हिंदी रंगमंच दिवस मनाया। सर्वप्रथम अध्यक्ष प्रोफेसर रणधीर सिन्हा ने वर्तमान में कोरोनावायरस से बचाव के लिए लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन करने का संदेश देते हुए हिन्दी रंगमंच दिवस की महत्ता पर अपने विचार रखे। रंगमंच परिचर्चा का शुभारंभ करते हुए उन्होंने हिंदी रंगमंच दिवस के मौके पर जिले के सभी कलाकार, साहित्यकार बंधुओं, कला प्रेमी एवं रंगकर्मी भाइयों को बधाई एवं शुभकामना दी l परिचर्चा में शामिल संस्था के संस्थापक सलाहकार रामकृष्ण शर्मा ने रंगमंच परिचर्चा में बताया कि रंगकर्म में कौशल पूर्ण समायोजन कलाकारों में होनी चाहिए l कल्पनाशील निर्देशक, चिंतन ,समर्पित ,कलाकारों की भूमिका अवश्य होनी चाहिए। उन्होंने रंगमंच के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला और रंगमंच दिवस की बधाई दी। संयोजक आशुतोष श्रीवास्तव व महासचिव को चंद्र कुशवाहा ने रंगमंच के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रंगमंच पर हिंदी का पहला नाटक शीतला प्रसाद त्रिपाठी कृत'' जानकी मंगल था। इसका मंचन बनारस के रॉयल थिएटर में 3 अप्रैल 1868 को किया गया था। व्हाट्सएप में आयोजित परिचर्चा में वरिष्ठ रंगकर्मी संस्था के पूर्व अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता उर्फ काका भैया ने सबको हिंदी रंगमंच की बधाई देते हुए हिंदी रंगमंच पर भी विस्तार रूप से प्रकाश डाला। l व कहां की रंगमंच का इतिहास वैदिक काल से रहा है l सर्वप्रथम असुर विजय तथा अमृत मंथन आदि नाटक देवताओं द्वारा की गई l जिसका कार्यभार भरतमुनि को सौंपा गया। उस समय संस्कृत का बोलबाला था l वास्तव में हिंदी नाटक का श्रेय भारतेंदु हरिश्चंद्र को जाता है l संस्था के अन्य सदस्यों ने हिंदी रंगमंच दिवस की बधाई देते हुए वर्तमान समय में कोरोना संक्रमण से बचने की जरूरत जतायी। परिचर्चा में सचिव कमलेश कुमार कोषाध्यक्ष संतोष नीरज, अंकेक्षक शशि श्रीवास्तव, मुन्ना सिंह, अधिवक्ता मनोज अज्ञानी, मुकुल मणि, संजय यादव, कृष्णा यादव, कुंदन कुमार समेत अन्य शामिल थे।
