मनुष्य द्वारा प्रकृति का दोहन करने का परिणाम हैं वायरस |

उपेंद्र कश्यप
औरंगाबाद /दाउदनगर
पूरा विश्व आज कोरोना संकट से परेशान है। एक अज्ञात शत्रु बना हुआ वायरस पुरी मानव सभ्यता के लिए घातक बन गया है। यह समस्या इस कारण खड़ी हुई है कि मनुष्य ने अपनी जरूरतों की पूर्ती के लिए प्रकृति के नियम को बिगाड़ा, उसका बेइंतहा दोहन किया, नतीजा इको सिस्टम बिगड़ गया है। मनुष्य को मानव जीवन के लिए प्रकृति का दोहन संतुलन बनाकर करना होगा, अन्यथा एक दिन ऐसा आयेगा जब वायरसों के संक्रमण से पूरी मानव सभ्यता ही ख़त्म हो जायेगी। यह बात शुक्रवार को प्राण विद्या पीठ के अध्यक्ष रंजन भाई ने कही। उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पीठ की बैठक की और कोरोना वायरस संकट पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने डॉ. अखिलेश कुमार एमबीबीएस एमडी, अरविंद तिवारी, वैद्य राधेश्याम यादव, वैद्य मदन सिंह एवं हरिद्वार से ग्लोबल प्रोफेसर एस एस बोहिदार के साथ चर्चा की। कहा कि धरती का हर सुख भोगने की मानव की चाह ने बहुत बड़ी गलती कर दी है। बढ़ती अबादी की जरूरतें-मकान, कल कारखाने के लिए आवश्यक्ता पूर्ती के लिए नदियों, पहाड़ों, जंगलों, खदानों का काफी दोहन किया। उन्हें नष्ट किया। नतीजा जीव-जन्तुओं को परेशानी हुई। उनका आशियाना उजड़ रहा। वायरस इसी कारण मनुष्य के शरीर को अपना निवास स्थान बनाने लगे। वायरस भुत तेजी से फैलने और मनुष्य के शरीर को संक्रमित करने में सक्षम होते हैं। वायरस कोइ नयी चीज नहीं हैं। मानव रहे न रहे, किन्तु वायरस थे, हैं और रहेंगे। रंजन भाई ने कहा कि हमें इको सिस्टम से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। कोरोना के वर्तमान संकट पर रंजन भाई ने कहा कि घरों में बंद रहें, कोरोना संकट भी खत्म होगा। किन्तु इसके बाद हर व्यक्ति को मानव सभ्यता के लिए प्रकृति के अनावश्यक दोहन से बचना होगा।