रिपोर्ट ;-गौतम शर्मा ,मो ० तस्लीम
डेहरी /रोहतास
बिहार के चुनाव आयोग ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर निकाय चुनाव को रद्द कर दिया।
चुनाव मैदान में खड़े उम्मीदवार अपने-अपने दाव की बिसात बिछा चुके थे। मतदाताओं को रिझा
चुके थे। मतदान के लिए कुछ ही दिन बचे थे। तब ही चुनाव रद्द हो गया। आगे चुनाव की तिथि
फिर आनी है। इस बीच आप अपनी चुनावी जीत हासिल करने में कितने करीब रहे है ? मौका है
आकलन कीजिये।
वार्ड पार्षद से लेकर मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद सभी अपने चुनाव चिन्ह के साथ प्रचार में
उतरे थे। कोई ढोलक ,तो कोई मोमबत्तियॉ तो कोई तितली ,कोई नल आदि को लेकर अपना वोट
मांग रहा था। उम्मीदवार मतदाताओं को रिझाने में लगे रहे। मतदाताओं का रुझान अभी वोट के
लिए बन ही रहा था कि मतदान की तिथि रद्द हो गई,लेकिन उम्मीदवार को अपने जीत का अंदाज़
लग गया होगा कि वो कितने पानी में है ? कहाँ कमी रह गई थी ? कहाँ वो कमजोर रहे ? इसका
पता बाखूबी चल गया होगा। चर्चाओं से पता चलता है कि उनका वोट प्रतिशत क्या रहा है ?कितना
मेहनत और करने की जरूरत है। क्या और योजनाए बनाये जा सकते है ? जो उनको आने वाले नई
मतदान की तिथि आने पर काम आएगा।
