दीपराज की रिपोर्ट ;-
बिहार में राजनीतिक घमाशान मचा हुआ है। सरकार के सहयोगी दल के नेता मुकेश सहनी और जीतन राम मांझी सरकार के कामकाज पर सवाल उठा रहे थे।दूसरी तरफ एलजेपी में बगावत अपना रंग दिखा रही थी। एलजेपी टूट गई। एलजेपी को तोड़ने का आरोप जदयू पर लगा। लेकिन सच्चाई ये है कि जदयू के अंदर भी सबकुछ ठीकठाक नहीं है। आज पहली बार जनता दल यूनाइटेड की तरफ से किये जा रहे सम्मेलन में जदयू के नेता उपेंद्र कुशवाहा को नजर-अंदाज कर दिया गया है। उन्हें पूछा तक नहीं गया है। गौरतलब है कि उपेंद्र कुशवाहा के पार्टी में इंट्री को लेकर आरसीपी सिंह नाराज बताये जा रहे थे। जेडीयू का वर्चुअल सम्मेलन आज 11 बजे से हुआ। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा समेत लगभग 1000 पदाधिकारी इस वर्चुअल सम्मेलन में जुड़ें। इस सम्मेलन में पार्टी के सभी क्षेत्रीय संगठन प्रभारी, प्रकोष्ठ के प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, सभी प्रदेश प्रवक्ता, जिला अध्यक्ष, मुख्य जिला प्रवक्ता, लोकसभा प्रभारी, विधानसभा प्रभारी और सभी प्रखंड अध्यक्षों को जोड़ा गया। लेकिन पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष बनाए गए उपेंद्र कुशवाहा को इस वर्चुअल सम्मेलन के लिए पूछा तक नहीं गया है। आरसीपी सिंह लगातार पार्टी मुख्यालय में बैठकें कर रहे हैं, लेकिन किसी भी बैठक में उपेंद्र कुशवाहा मौजूद नहीं रहे। कुशवाहा ने भले ही अपनी पार्टी का जेडीयू में विलय कर दिया हो, लेकिन इसके बावजूद आरसीपी सिंह उन्हें ज्यादा तरजीह देते नजर नहीं आ रहे हैं। पिछले दिनों जेडीयू में शामिल होने वाले उपेंद्र कुशवाहा के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करना शुरू की थी कि उपेंद्र कुशवाहा जल्द ही जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगे। आरसीपी सिंह के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद नीतीश कुमार कुशवाहा को बड़ी जिम्मेदारी देने जा रहे हैं। एक तरफ कुशवाहा के समर्थक यह महसूस कर रहे हैं कि पार्टी में उन्हें तवज्जो नहीं दी जा रही, तो वही आरसीपी सिंह उपेंद्र कुशवाहा से संगठन या अन्य मुद्दों पर चर्चा तक नहीं करते हैं। नीतीश कुमार भले ही लव-कुश की जोड़ी के बदौलत पार्टी का जनाधार मजबूत करना चाहते हो। लेकिन फिलहाल आरसीपी सिंह व उपेंद्र कुशवाहा के साथ वो सहज नजर नहीं आते हैं।
